मध्यप्रदेश में चले खाद संकट के बाद अब कृषि विभाग ने इससे निपटने का फॉर्मूला तय किया है। इसके लिए अब किसानों को फार्मर आईडी की मदद से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। आईडी में दर्ज जमीन के रकबे और लगाई गई फसल में आवश्यक उर्वरक की गणना कर किसान को दी जाने वाली खाद की मात्रा तय होगी।
3 जिलों पायलट प्रोजेक्ट के तहत व्यवस्था लागू
रजिस्ट्रेशन के बाद ई-टोकन जेनरेट होगा। इस टोकन की मदद से वितरण केंद्र पर किसानों को जरुरत के मुताबिक खाद दी जाएगी।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत जबलपुर, विदिशा और शाजापुर में नई व्यवस्था 1 अक्टूबर से लागू कर दी गई है।
इन तीन जिलों में अब सभी सहकारी समितियों, डबल लॉक केंद्र, मार्केटिंग फेडरेशन, एमपी एग्रो केंद्र के अलावा निजी केंद्रों पर भी यही व्यवस्था लागू होगी।
किसान संगठन बोले-अब दूर होनी चाहिए गड़बड़ी
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा कि लगभग 10 साल से किसान खाद की समस्या से जूझ रहे हैं, सरकार को स्थाई हल ढूंढना चाहिए।
कुछ महीने पहले खाद एटीएम भी दिए गए थे। उन्होंने कहा, अब देखना होगा नया सिस्टम कितना फायदेमंद होता है।
वहीं, कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के कार्यकारी अध्यक्ष केदार सिरोही ने कहा कि रबी सीजन शुरू होते ही ऐसे प्रयोग ठीक नहीं, समय रहते करना था।







