इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के कुशल निर्देशन और पुलिस उपायुक्त (अपराध) के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2’ के तहत साइबर अपराधों और अवैध रूप से इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इसी क्रम में राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से प्राप्त पत्र तथा I4C (गृह मंत्रालय), NCRP पोर्टल एवं साइबर क्राइम पोर्टल से प्राप्त तकनीकी इनपुट के आधार पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक संदिग्ध म्यूल बैंक खाते की सूक्ष्म जांच की गई। जांच में सामने आया कि बैंक खाते का मूल खाताधारक आनंद चौरसिया निवासी नंदा नगर, इंदौर है, जिसके द्वारा संगठित अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था।
💸 4,000 रुपये के लालच में बेचा था बैंक खाता और सिम कार्ड
जांच के दौरान खाताधारक आनंद चौरसिया से पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
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विशाल शेखावत की संलिप्तता: आनंद चौरसिया ने विशाल शेखावत के कहने पर यह बैंक खाता खुलवाया था। खाते में उपयोग होने वाली सिम कार्ड का रजिस्ट्रेशन भी विशाल द्वारा ही कराया गया था।
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संचालन का सौदा: इसके बाद आनंद चौरसिया ने उक्त बैंक खाते की रजिस्टर्ड सिम, संपूर्ण बैंकिंग किट और खाते का नियंत्रण मात्र 4,000 रुपये के एवज में विशाल शेखावत को सौंप दिया था। इस प्रकार उस बैंक खाते का वास्तविक संचालन और उपयोग विशाल शेखावत द्वारा किया जा रहा था।
🌐 देश के 5 राज्यों में दर्ज थीं साइबर ठगी की शिकायतें
साइबर क्राइम पोर्टल और उपलब्ध समन्वय इनपुट का परीक्षण करने पर यह बात सामने आई कि उक्त म्यूल बैंक खाते के विरुद्ध देश के 05 अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी की गंभीर शिकायतें दर्ज हैं:
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तमिलनाडु: मदुरै सिटी, थाना के. पुदुर
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दिल्ली: साउथ डिस्ट्रिक्ट, साइबर पुलिस स्टेशन साउथ
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गुजरात: सुरेंद्रनगर, थाना वाधवान
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महाराष्ट्र: बृहन्मुंबई सिटी, थाना नेहरू नगर
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तेलंगाना: हैदराबाद, थाना बोराबांडा
⚖️ दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज
इन शिकायतों से यह स्पष्ट हो गया कि संबंधित बैंक खाते का उपयोग विभिन्न महानगरों और राज्यों में बड़े पैमाने पर साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया गया था।
जांच में खाताधारक आनंद चौरसिया और वास्तविक उपयोगकर्ता विशाल शेखावत की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने पर थाना क्राइम ब्रांच इंदौर में अपराध क्रमांक 0179/2026, धारा 318(4), 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत औपचारिक प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है।
🔍 अग्रिम विवेचना और नेटवर्क की तलाश जारी
क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा प्रकरण में म्यूल बैंक खाते के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन, विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों और इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट की गहराई से जांच की जा रही है। साथ ही, इन आरोपियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले अन्य सहयोगियों तथा इस साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े सभी संदिग्धों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।







