बालाघाट। मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले बालाघाट की धरती पर उगने वाला प्रसिद्ध चिन्नौर चावल अब न केवल देश बल्कि विदेशों तक अपनी महक बिखेरने के लिए तैयार है। वारासिवनी और लालबर्रा क्षेत्र में उगाया जाने वाला यह चिन्नौर धान अपने सुगंधित, स्वादिष्ट, पौष्टिक और कोमल गुणों के लिए जाना जाता है। वर्तमान में इसे नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन में विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है, जहां ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत देश-विदेश के व्यापारियों और निर्यातकों के सामने इसे पेश किया जा रहा है ताकि इसकी ग्लोबल डिमांड बढ़ सके।
🌍 जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर को मिल रहा वैश्विक मंच: लालबर्रा की काली मिट्टी और जलवायु से बनती है इसकी खास विशेषता
बालाघाट के इस विशेष चिन्नौर धान को पहले ही जीआई (GI) टैग मिल चुका है। कृषि विपणन बोर्ड और अपीडा (APEDA) के संयुक्त तत्वावधान में लगे इस स्टॉल के जरिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा संवाद स्थापित हो रहा है। बालाघाट के लगभग 1,525 हेक्टेयर में 2,700 किसान सालाना करीब 1,980 टन चिन्नौर धान का उत्पादन करते हैं, जिसे बढ़ाकर 5,000 हेक्टेयर तक करने की योजना है। इस धान की विशेषता यह है कि यह केवल बालाघाट के वारासिवनी और लालबर्रा की उपजाऊ काली चिकनी मिट्टी, अनुकूल जलवायु और वैनगंगा नदी के भरपूर सिंचाई जल के कारण ही संभव हो पाता है, जिससे स्थानीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का बेहतरीन विकल्प मिलने की उम्मीद है।
