उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन की पहचान केवल भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भूमि ऋषि-मुनियों की तपस्या और संतों की समाधियों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। शिप्रा नदी के तट के समीप हरसिद्धि मंदिर के पीछे संतोषी माता मंदिर क्षेत्र में स्थित अगस्तेश्वर महादेव मंदिर और उससे जुड़ा सिद्ध गुसाई समाधि स्थल बेहद खास धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर के पुजारी गोलू गुरु के अनुसार, यहां लगभग 200 संतों और तपस्वियों की समाधियां हैं, जो इस स्थान की प्राचीन संत परंपरा को दर्शाती हैं।
📜 ऋषि अगस्त की कथा और अहिल्याबाई होल्कर द्वारा जीर्णोद्धार: 84 महादेव यात्रा का यहीं से होता है आरंभ और समापन
स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, देवताओं को आसुरी शक्तियों से मुक्ति दिलाने के बाद ऋषि अगस्त ने ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए इसी महाकाल वन में वटवृक्ष के समीप तपस्या की थी, जिसके बाद महादेव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और यह स्थान अगस्तेश्वर महादेव के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उज्जैन की प्रसिद्ध 84 महादेव यात्रा का आरंभ और समापन इसी मंदिर से होता है। मुगलकाल में खंडित हुए इस ऐतिहासिक समाधि स्थल का मराठा काल में महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया था, जो आज भी सनातन संस्कृति और परंपरा का अनूठा केंद्र है।





