जबलपुर। जिस उम्र में लोग आमतौर पर आराम करना पसंद करते हैं, उस उम्र में जबलपुर के पास स्थित पडुवा गांव के 75 वर्षीय भूरे पहलवान बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में जुटे हैं। उन्होंने वर्षों पुरानी उस सामाजिक सोच को चुनौती दी है, जिसमें लड़कियों के लिए कई तरह की पाबंदियां होती थीं। जिस अखाड़े में कभी सिर्फ लड़कों को पहलवानी सिखाई जाती थी, आज वहां गांव की बेटियां लाठी, तलवार और कुश्ती के दांव-पेच सीख रही हैं। भूरे पहलवान अब तक 100 से अधिक बच्चियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
🛡️ मोबाइल से दूर अखाड़े से जुड़ रहीं बेटियां: अन्नपूर्णा जैसी छात्राएं बन रही हैं आत्मविश्वास की मिसाल
पडुवा गांव में लोधी समाज की बड़ी आबादी के बीच पारंपरिक बंदिशों को तोड़ते हुए भूरे पहलवान ने लड़कियों को कुश्ती, तलवारबाजी और शरीर की फुर्ती बढ़ाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनकी शिष्या अन्नपूर्णा बताती हैं कि इस ट्रेनिंग से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और वे अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले रही हैं। भूरे पहलवान की इस प्रेरणादायक पहल से गांव की बच्चियां मोबाइल पर समय बर्बाद करने के बजाय अखाड़ा पहुंचकर खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बना रही हैं।



