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शेयर बाजार में तेज गिरावट: 5 दिन में दो महीने का नुकसान, सेंसेक्स 84 हजार के नीचे

MP Ki Awaaz by MP Ki Awaaz
January 9, 2026
in व्यापार

शेयर बाजार में लगातार 5वें दिन गिरावट देखने को मिल रही है. शुक्रवार को सेंसेक्स में 450 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखी गई. जिसकी वजह से सेंसेक्स 84 हजार अंकों के नीचे चला गया. खास बात तो ये है कि करीब दो महीने के बाद सेंसेक्स 83 हजार अंकों के लेवल पर देखने को मिला है. 11 नवंबर को कारोबारी सत्र के दौरान आखिरी बार सेंसेक्स 83 हजार अंकों के लेवल पर आ गया था. वहीं दूसरी ओर निफ्टी में भी गिरावट देखने को मिल रही है.

खास बात तो ये है कि इन पांच दिनों में शेयर बाजार में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुका है. इन 5 दिनों में शेयर बाजार निवेशकों को 11.56 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. वैसे गुरुवार को सेंसेक्स में 700 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखने को मिली थी. इसका मतलब है कि सेंसेक्स में दो दिनों में 1200 अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में किस तरह के आंकड़े देखने को मिले हैं.

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

गुरुवार की तरह शुक्रवार को भी सेंसेक्स बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहा है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 473 अंकों की गिरावट के साथ 83,707.98 अंकों के करीब दो महीने के लोअर लेवल पर पहुंच गया. वैसे दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 438.42 अंकों की गिरावट के साथ 83,747.39 अंकों पर कारोबार कर रहा था. वैसे सेंसेक्स 84,022.09 अंकों पर ओपन हुआ था. जबकि एक दिन पहले सेंसेक्स 84,180.96 अंकों पर बंद हुआ था.

वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. आंकड़ों को देखें तो कारोबारी सत्र के दौरान निफ्टी 141.7 अंकों की गिरावट के साथ 25,735.15 अंकों साथ लो लेवल पर आ गया. वैसे एक​ दिन पहले निफ्टी गिरावट के साथ 25,876.85 पर बंद हुआ था. वैसे आज सुबह निफ्टी 25,840.40 अंकों पर ओपन हुआ और दोपहर 12 बजरि 5 मिनट पर निफ्टी 122.50 अंकों की गिरावट के साथ 25,761.45 कारोबार कर रहा था.

5 दिनों ने बाजार को धकेला दो महीने पीछे

लगातार 5 दिनों की गिरावट ने शेयर बाजार को दो महीने पीछे धकेल दिया. 2 जनवरी को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 85,762.01 अंकों पर दिखाई दिया था. जोकि 9 अक्टूबर को कारोबारी दिन में 83,707.98 अंकों पर आ गया. इसका मतलब है कि सेंसेक्स में 2,054.03 अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है. इस​का मतलब है कि सेंसेक्स ने निवेशकों को 2 फीसदी से ज्यादा का नुकसान पहुंचा दिया है. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी इस पांच दिनों में बड़ी गिरावट देख चुका है. आंकड़ों को देखें तो 2 जनवरी को निफ्टी 26,328.55 अंकों पर बंद हुआ था, जोकि 9 जनवरी को कारोबारी सत्र के दौरान 25,735.15 अंकों पर आ गया. इसका मतलब है कि ​निफ्टी में इस दौरान 593.4 अंकों यानी 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

  1. एफआईआई की लगातार बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को 3,367.12 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. 2 जनवरी को संक्षिप्त विराम के बाद यह एफआईआई द्वारा लगातार चौथा सत्र था जब बिकवाली जारी रही. खास बात तो ये है कि जनवरी के महीने में विदेशी निवेशक शेयर बाजार से अब 8080 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं.
  2. टैरिफ पर अमेरिकी फैसले से पहले सतर्कता: निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ की वैधता पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. यदि टैरिफ को अवैध घोषित किया जाता है, तो अमेरिकी सरकार को इंपोर्टर्स को लगभग 150 अरब अमेरिकी डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं. ए​क दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अनुमोदित रूस प्रतिबंध अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारत पर लगभग 500 फीसदी टैरिफ लगाए जाने की संभावना के कारण कल बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी.
  3. टैरिफ को लेकर नई चिंताएं: ट्रंप द्वारा नई दिल्ली के रूसी कच्चे तेल की खरीद के विरोध में भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने के संकेत देने के बाद हाल के सत्रों में बेंचमार्क सूचकांकों में भारी गिरावट आई है. पिछले चार सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 1.8 प्रतिशत और 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इसके अलावा, ट्रंप ने एक प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ उनकी “बहुत ही सार्थक बैठक” हुई, जिसमें राष्ट्रपति ने द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी.
  4. कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.53 फीसदी बढ़कर 62.32 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई के रिस्क को बढ़ाती हैं, जिसका असर शेयर बाजारों पर पड़ता है.
  5. रुपए की कमजोरी: शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 89.97 पर आ गया. इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया 88.88 पर खुला, लेकिन बाद में और गिर गया. फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स का कहना है कि अमेरिका द्वारा संभावित टैरिफ और कमजोर घरेलू शेयर बाजारों को लेकर चिंताओं के कारण विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली जारी रही, जिससे फॉरेन करेंसी पर दबाव पड़ा.

5 दिनों में 11.56 लाख करोड़ का नुकसान

शेयर बाजार में लगातार 5वें दिन गिरावट देखने को मिल रही है. लेकिन निवेशकों का नुकसान काफी मोटा हो गया है. आंकड़ों देखें तो 2 जनवरी को जब शेयर बाजार बंद हुआ था, तब बीएसई का मार्केट कैप 4,81,24,779.35 करोड़ रुपए पर था, जो 9 जनवरी को कारोबारी सत्र को बीएसई का मार्केट कैप गिरकर 4,69,69,004.46 करोड़ रुपए पर आ गया. इसका मतलब है कि निवेशकों को इस दौरान 11,55,774.89 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया है.

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