दीपावली पर खुशियों का उजाला लेकर जरूरतमंदों के बीच पहुंचीं जैन समाज की बेटियां, बांटे वस्त्र और मिठाइयां
आगर मालवा – भावेश नाहर।
दीपावली का पर्व सिर्फ अपने घरों को रोशन करने का नहीं, बल्कि उन चेहरों पर मुस्कान लाने का भी है, जिनके घरों में खुशियों के दीप संसाधनों की कमी के कारण कुछ फीके रह जाते हैं। इसी भावना को साकार करते हुए आगर जैन समाज के आगमोद्वारक बालिका मंडल की बालिकाओं ने सेवा और संवेदनशीलता की एक खूबसूरत मिसाल पेश की।






जब दीपावली पर हर घर में नए कपड़े, मिठाइयों और खुशियों की तैयारियां चल रही थीं, तब मंडल की बालिकाएं नगर की गरीब और जरूरतमंद बस्तियों में पहुंचीं। उनके हाथों में सिर्फ उपहार नहीं, बल्कि अपनापन और खुशियां बांटने का भाव था।
बालिकाओं ने जरूरतमंद महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को साड़ियां, वस्त्र, ऊनी कपड़े, कंबल, शॉल, स्वेटर और मिठाइयां वितरित कीं। इन उपहारों को पाकर किसी के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी, तो किसी बच्चे की आंखों में दीपावली की चमक नजर आई।






यह पहल केवल कपड़े और मिठाइयां बांटने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने एक खूबसूरत संदेश दिया कि त्योहार की असली खुशी तब बढ़ती है, जब हम अपनी खुशियों में दूसरों को भी शामिल करते हैं।
आगमोद्वारक बालिका मंडल की इन बेटियों ने अपने सेवा भाव से यह साबित किया कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल और नेक सोच की जरूरत होती है।
सचमुच, दीपावली के असली दीप तो वही हैं, जो किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान बनकर जलते हैं।
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