इंदौर : इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के बाद हुए घटनाक्रम के बाद इंदौर निगम आयुक्त दिलीप यादव ने बड़ा खुलासा किया है। इन्दौर निगम आयुक्त दिलीप यादव ने माना कि टेंडर को रोका गया था क्योंकि अमृत योजना के तहत भी यही काम स्वीकृत हुआ था इसलिए एक फ़ाइल और जोड़ी थी।
सितंबर की जगह दिसंबर को खोला गया टेंडर
मतलब कि जिस पाइपलाइन से दूषित पानी आ रहा था उसको नहीं बदला गया। उसके काम में देरी की गई, जिस पाइपलाइन से नाले का पानी आय़ा उसे महीनों पहले बदला जाना था लेकिन नगर निगम के अधिकारा टेंडर को दबाकर बैठे रहे। पाइपलाइन बदलने का टेंडर तब खोला गया जब लोगों ने अपनी जान गंवा दी, ये बड़ा खुलासा टेंडर को लेकर हुआ है। जानकारी के मुताबिक ये टेंडर 17 सितंबर की जगह 29 दिसंबर को खोला गया, मतलब कि महीनों की लेटलतीफी के बाद जब दूषित पानी से हाहाकार मच गया।
निर्दोष मौतों के बाद जागा प्रशासन
साथ ही टेंडर को लेकर निगमायुक्त ने कहा कि एक टेंडर उसमें था, अलग से एक फाइल बनी थी, लेकिन उसका काम अमृत योजना के माध्यम से भी बना था और उसे काम को अमृत योजना के तहत करना था। इसलिए उस काम को नहीं किया गया था। वही निगम अधिकारी संजीव श्रीवास्तव को लेकर कहा कि जिन लोगों की शिकायतें आती थी उन पर कार्रवाई की जाती थी।
निगम आयुक्त ने कहा कि साल 1997 में यह लाइन बनी थी और उसको ही चेंज करने के लिए अमृत में लिया गया था, इसके लिए अलग से टेंडर भी निकाल दिया गया था। जो दूसरा काम था उसमें भी सुधार किए जा रहे हैं और अभी भी हमारी पूरी टीम लगी हुई है।
दिलीप यादव का कहना है कि दूषित पानी की जैसे हमने सैंपल लिया है और जो सैंपल रिपोर्ट आई है वह दृष्टि पानी की आ गई है। लाइन को ठीक करना शुरू कर दिया है और वह पॉइंट हमने चिन्हित किए हैं, जहां से दूषित पानी घुस रहा है। भागीरथपुरा की चौकी के पीछे जो पॉइंट चिन्हित किया था उसके बाद कई और जगह पर चेक किया जा रहा है। भागीरथपुर में 2000 से अधिक चैंबर है उन सब की जांच पड़ताल की जा रही है और सीवरेज के चेंबर के नीचे से जहां पर भी पानी के पाइपलाइन क्रॉस हो रही है।
इसको एक-दो दिन और लगेंगे इसके लिए भागीरथपुरा क्षेत्र में टैंकर से पानी सप्लाई किया जा रहा है और जो भी लोग उसके बाद भी पानी का उपयोग कर रहे हैं वह उबालकर पानी का प्रयोग करें । इसके लिए हम लगातार अलॉसमेंट करवा रहे हैं। अभी भी एक-दो दिन वहां पर स्थितियां नॉर्मल होने में लगेगी और उसके बाद लोग नॉर्मल तरीके से पानी को पी सकते हैं।







