जबलपुर। दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजार में मिठाई और नमकीन की मांग तेजी से बढ़ने लगती है, लेकिन इसके साथ ही मिलावट का काला कारोबार भी चरम पर पहुंच जाता है। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ कारोबारी नकली या मिलावटी मावा, पनीर और अन्य खाद्य सामग्रियों की बिक्री शुरू कर देते हैं। कई जगहों पर तो बासी, पुराने मावे और एक्सपायरी डेट के रेडी-टू-मिक्स उत्पादों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर भारी संकट मंडरा रहा है।
🧪 नमूनों की जांच रिपोर्ट में महीनों की देरी: खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की सुस्ती से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद
त्योहारों के सीजन में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जगह-जगह छापे मारकर सैंपल तो एकत्र करती है, लेकिन जांच प्रक्रिया बेहद धीमी है। खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने में महीनों का समय लग जाता है, जिससे विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। जब तक लैब से रिपोर्ट आती है, तब तक मिलावटी सामान बाजार में बिक चुका होता है और उपभोक्ता अपनी सेहत से इसकी कीमत चुका चुके होते हैं। इस बार भी लैब अपनी पूर्ण क्षमता से काम नहीं कर पा रही है, जिससे मिलावटी सामान की खपत की आशंका बनी हुई है।





