भोपाल। राजधानी भोपाल के सुनियोजित और टिकाऊ विकास का दावा करते हुए लाए गए ‘भोपाल मास्टर प्लान 2047’ की सबसे अहम कड़ी यानी लोकल एरिया प्लान (LAP) को ही नीतिगत स्पष्टता से दूर रख दिया गया है। नगर नियोजन (टाउन प्लानिंग) का स्थापित सिद्धांत है कि जब तक पूरे शहर के केवल कागजी खाके के बजाय जोन और वार्ड स्तर पर जमीनी सूक्ष्म योजनाएं (माइक्रो-प्लानिंग) तैयार नहीं की जाएंगी, तब तक किसी भी शहर का व्यवस्थित और टिकाऊ विकास संभव नहीं है।
⚠️ बिना वहन-क्षमता के बहुमंजिला इमारतों को मिलेगी अनुमति: समय-सीमा तय न होने से नए और पुराने इलाकों पर मंडराया संकट
चिंताजनक बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने एलएपी के माइक्रो-प्लानिंग मॉडल पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित नहीं किया। ड्राफ्ट (प्रारूप) में यह कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये लोकल एरिया प्लान आखिर कब बनकर तैयार होंगे और कब से लागू किए जाएंगे। किसी भी निश्चित समय-सीमा के न होने के कारण शहर में बिना वहन-क्षमता (कैरीइंग कैपेसिटी) का आकलन किए ही बहुमंजिला इमारतों और नए निर्माण की अनुमतियां दी जाने लगेंगी। इससे भोपाल के पुराने और नए दोनों रिहायशी इलाकों का नागरिक संतुलन और बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमराने की आशंका है।



