रतलाम । मध्य प्रदेश में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के लिए मशहूर मालवा क्षेत्र इस बार रबी सीजन में गेहूं की बुवाई के मामले में पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है। इसकी मुख्य वजह इस मानसून सीजन में हुई कम बारिश और किसानों का कम पानी वाली फसलों तथा लहसुन की खेती की ओर बढ़ता रुझान है।
आंकड़ों के अनुसार, अकेले रतलाम जिले में इस वर्ष गेहूं के बोए जाने वाले रकबे में 33 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट आने का अनुमान है। यही चिंताजनक स्थिति पड़ोसी मंदसौर और नीमच जिलों में भी देखने को मिल रही है। आमतौर पर मालवा के उज्जैन, धार, रतलाम, मंदसौर और आगर मालवा जिलों में सर्वाधिक गेहूं की खेती की जाती है, लेकिन इस बार सिंचाई के लिए पानी की अनुपलब्धता के चलते स्थिति बिल्कुल बदल गई है।
🌧️ औसत से आधी बारिश और तालाबों में महज 45% पानी, कृषि विभाग ने की कम पानी वाली फसलों की अपील
रतलाम जिले में इस वर्ष बारिश के आंकड़ों ने प्रशासन और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है:
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बारिश का आंकड़ा: जिले में सामान्यत: 1100 मिमी (mm) औसत बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष केवल 592 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है।
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जल निकायों की स्थिति: सिंचाई के लिए जिले के प्रमुख तालाबों और जलाशयों में केवल 45 प्रतिशत तक ही जल भराव हो सका है।
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कृषि विभाग का बयान: कृषि विभाग के उपसंचालक बीएस अर्गल ने बताया कि कम जलस्तर को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों से कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें बोने की अपील की जा रही है। पिछले वर्ष रतलाम में 2 लाख 66 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था, जबकि इस वर्ष यह घटकर महज 1 लाख 80 हजार हेक्टेयर रहने की संभावना है।
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किसान की राय: स्थानीय किसान अरविंद पाटीदार ने बताया कि सिंचाई के पानी की किल्लत के कारण किसान गेहूं के बजाय सीमित मात्रा में लहसुन तथा कम पानी वाली फसलें जैसे चना और सरसों लगाने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
🚫 संकट की मार: रतलाम में 50 हजार हेक्टेयर जमीन में नहीं हो सकेगी रबी फसलों की बुवाई
जल संकट का असर इतना भयावह है कि जिले के कई इलाकों में खेत पूरी तरह खाली रहने की नौबत आ गई है:
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खाली रहेगी जमीन: रतलाम के हल्की जमीन वाले ब्लॉक जैसे सैलाना, रावटी और बाजना क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत के कारण रबी सीजन की बुवाई होना लगभग असंभव है।
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बुवाई का लक्ष्य घटा: कृषि विभाग के अनुसार, जिले में सामान्य दिनों में लगभग 3 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बुवाई होती थी, लेकिन इस बार लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र बिना बुवाई के ही खाली रह जाएगा।
📉 मध्य प्रदेश के कुल गेहूं उत्पादन पर पड़ सकता है सीधा असर
गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले मालवा बेल्ट में रकबा घटने से इस बार मध्य प्रदेश के कुल राज्यस्तरीय गेहूं उत्पादन के आंकड़ों में गिरावट आना तय माना जा रहा है। रतलाम में 33% रकबा कम होने और आसपास के अन्य जिलों में भी इसी तरह का जल संकट होने से मंडी में गेहूं की आवक और सरकारी उपार्जन पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।

