सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठित अधिवक्ता और समाज सुधारक नाजिया इलाही खान 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर उज्जैन में अपने दिवंगत पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करने जा रही हैं। एक मुस्लिम पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने के बावजूद सनातन परंपरा के अनुसार तर्पण करने के उनके इस साहसिक और अनूठे निर्णय ने धार्मिक तथा सामाजिक गलियारों में एक नई बहस और चर्चा छेड़ दी है। नाजिया इलाही खान ने इंदौर प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में बताया कि वे पिछले कई वर्षों से अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करना चाहती थीं और अब वे अपनी मजहबी पृष्ठभूमि से परे हटकर पूरी श्रद्धा के साथ यह अनुष्ठान करेंगी।
गोमूत्र सेवन और गरबा पंडालों की सुरक्षा को लेकर बेबाक बयान
अपने बयानों और सनातन मूल्यों के मुखर समर्थन के लिए पहचानी जाने वाली नाजिया इलाही खान ने कई अन्य संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने दावा किया कि वे खुद नियमित रूप से गोमूत्र का सेवन करती हैं और इसके स्वास्थ्य लाभों का अनुभव करती हैं, साथ ही उन्होंने अन्य लोगों से भी ऐसा करने का आह्वान किया है। आगामी नवरात्रि आयोजनों पर बोलते हुए उन्होंने सुझाव दिया था कि गरबा पंडालों में केवल पहचान पत्र देखकर ही प्रवेश दिया जाना चाहिए ताकि संस्कृति और सुरक्षा की पवित्रता बनी रहे। सनातन मूल्यों के समर्थन के चलते उन्हें कई बार धमकियाँ भी मिल चुकी हैं, जिनमें पाकिस्तान से आने वाली कॉल्स भी शामिल हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इन धमकियों से डरने वाली नहीं हैं।
🛕 महाकाल की अनन्य भक्त, तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई से मिली थी पहचान
धार्मिक आस्था के चलते नाजिया इससे पहले भी दो बार उज्जैन आ चुकी हैं। मार्च 2025 में रमजान के पवित्र महीने के दौरान उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह की दहलीज से बाबा महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना की थी और मार्च 2026 में भी वे दर्शन करने पहुँची थीं। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली नाजिया इलाही खान को देशव्यापी पहचान तब मिली जब उन्होंने बहुचर्चित तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ मुख्य याचिकाकर्ता इशरत जहां की कानूनी पैरवी की थी। वर्ष 2018 से वे भाजपा से जुड़ी हैं और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों तथा सामाजिक सुधारों के मुद्दों पर प्रखरता से अपनी बात रखती रही हैं।







