महाराष्ट्र के ठाणे कोर्ट ने 2015 के दंगों के मामले में पूरे 10 साल बाद सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया है. इस दंगे में पुलिसकर्मियों को चोट लगी थी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. अदालत ने पहचान में विफलता और गंभीर जांच की खामियों का हवाला देते हुए सभी 17 आरोपियों को बरी किया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge ) वसुधा एल. भोसले ने 8 सितंबर को यह फैसला सुनाया. उन्होंने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन की ओर से पेश किए गए सबूत आरोपियों को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे.
यह घटना 2 जनवरी 2015 को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के दिवा रेलवे स्टेशन पर हुई थी. अभियोजन के अनुसार, हथियारों से लैस भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिस अधिकारियों पर हमला किया, जो हालात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे. इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया. 2 आरोपी संतोष पांडुरंग सकपाल और बिंटु महावीर चौहान की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई.
















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