भोपाल। सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों को समय से नहीं भरने से सुप्रीम कोर्ट नाराज है। उसके हालिया निर्देश के बाद मध्य प्रदेश में भी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य सूचना आयोग में 10 पद स्वीकृत हैं। मुख्य सूचना आयुक्त सहित तीन पद भरे हुए हैं जबकि सात पद खाली हैं। पद रिक्त होने से राज्य सूचना आयोग में 23 हजार से अधिक अपीलें लंबित हैं।
सूचना आयुक्त के तीन पद भरने के लिए राज्य सरकार को 219 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं। इनके दस्तावेजों की छानबीन कर ली गई है। माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए समिति की बैठक बुला सकते हैं।
समिति में मुख्यमंत्री के अलावा एक मंत्री और नेता प्रतिपक्ष भी सदस्य होते हैं। प्रदेश में एक साल पहले सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन रुकी पड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद इसने गति पकड़ी है।
बता दें, राज्य सूचना आयोग में मार्च, 2024 में कई पद रिक्त हो गए थे। 10 सितंबर, 2024 को मुख्य सूचना आयुक्त पद के लिए सेवानिवृत्त विशेष पुलिस महानिदेशक विजय यादव का चयन किया गया। तीन अन्य सूचना आयुक्त बनाए गए थे। इसके बाद से सात पद रिक्त हैं।
बता दें, नवंबर और दिसंबर, 2025 में इस विषय पर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने चेतावनी दी थी कि यदि खाली पदों को नहीं भरा गया, तो सूचना का अधिकार कानून एक निष्प्रभावी कानून बनकर रह जाएगा।
अधिकारियों व कर्मचारियों के आधे से ज्यादा पद खाली आयोग में केवल सूचना आयुक्तों के पद ही रिक्त ही नहीं हैं बल्कि अधिकारियों व कर्मचारियों के भी आधे से ज्यादा पद खाली हैं। जिसके चलते समय पर सुनवाई नहीं हो रही है। वर्ष 2005 में लागू हुए सूचना का अधिकार अधिनियम को अब 21 वर्ष हो रहे हैं।
यह अधिनियम सरकार के विभागों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था तय करता है, लेकिन सरकार इसका पालन कराने में पिछड़ रही है। आयोग में उप सचिव, अवर सचिव, निज सचिव, विधि अधिकारी और एसडीओ के अलावा निज सहायक, कंप्यूटर आपरेटर, प्रोग्रामर, लिपिक, स्टेनो टाइपिस्ट के 55 पद स्वीकृत हैं। इनमें से अधिकांश पद रिक्त हैं।
















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