भोपाल: अयोध्या बायपास पर हरियाली उजाड़ने के मामले में गुरुवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में सुनवाई होगी। यहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा 16 किलोमीटर लंबा 10 लेन सड़क प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इस मार्ग पर करीब आठ से दस हजार पेड़ मौजूद हैं, जिनमें से लगभग दो से ढाई हजार पेड़ 22, 23 और 24 दिसंबर 2025 को काट दिए गए।
पर्यावरण प्रेमी उमाशंकर तिवारी ने बताया कि NHAI ने प्रति पेड़ छह हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि जमा कर कुल 7,082 पेड़ों को काटने की अनुमति प्राप्त की थी। इसके बाद रातों-रात पेड़ों की कटाई कर दी गई। इस परियोजना का शहर के पर्यावरण प्रेमी शुरू से ही विरोध कर रहे हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने 18 मई को प्रदर्शन कर NGT में याचिका दायर की थी। इस बीच हाईकोर्ट ने भी पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद 10 लेन सड़क परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई की गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने दो से ढाई हजार पेड़ों की कटाई को लेकर दोबारा एनजीटी का दरवाजा खटखटाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने आठ जनवरी तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी। चूंकि आज आठ जनवरी है, ऐसे में बचे हुए करीब छह हजार पेड़ों के भविष्य पर आज निर्णय होने की संभावना है। इस कारण शहर के नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों की निगाहें NGT के फैसले पर टिकी हुई हैं।
सुनवाई के दौरान न केवल पेड़ों की कटाई की वैधता पर बहस होगी, बल्कि उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी, जिन्होंने 22 दिसंबर को लगी रोक के बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होने दी। एनजीटी यह भी परखेगा कि क्या विकास कार्य के लिए यह पर्यावरणीय नुकसान अपरिहार्य था या नियमों की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में कार्रवाई की गई।
एनएचएआई का वकील अपना पक्ष रखेगा और कटाई की अनिवार्यता व कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करेगा।
















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