गुना : गुना रेलवे स्टेशन पर शनिवार शाम इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल देखने को मिली, जब मौत से जूझ रही एक अज्ञात महिला और उसकी छह माह की मासूम बच्ची के लिए रेलवे स्टाफ देवदूत बनकर सामने आया। स्टेशन के वेटिंग एरिया में लगभग 40 वर्षीय महिला बेहोश पड़ी मिली, जिसे मिर्गी के झटके आ रहे थे, जबकि उसकी बच्ची भूख और डर से मां के पास बिलख रही थी।
स्टेशन प्रबंधन से सूचना मिलते ही रेलवे मेडिकल टीम तुरंत मौके पर पहुंची। मेडिकल ऑफिसर डॉ. गौरव प्रताप सिंह, नर्सिंग अधीक्षक आर.बी. मीणा और वरिष्ठ ड्रेसर अवधेश शर्मा ने बिना देर किए महिला को प्राथमिक उपचार दिया और जीभ कटने से बचाया। हालत गंभीर होने पर महिला को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है। महिला के साथ कोई परिजन मौजूद नहीं होने के कारण सबसे बड़ी चिंता उसकी मासूम बच्ची की देखरेख को लेकर थी। ऐसे में रेलवे मेडिकल ऑफिसर, आरपीएफ जवान संदीप सैनी और महिला कांस्टेबल स्नेहा यादव ने मानवीय पहल करते हुए बच्ची को सुरक्षित संभाला। उच्च अधिकारियों से समन्वय के बाद बच्ची को रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा संचालित बाल शिशु गृह में सुरक्षित रखवाया गया, जहां उसे तत्काल दूध पिलाया गया और ठंड से बचाव की व्यवस्था की गई।
रेलवे प्रशासन और मेडिकल टीम की तत्परता से महिला की जान तो बच गई है, लेकिन वह फिलहाल जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में बेसुध है। महिला की पहचान और उसके परिजनों की जानकारी अब तक सामने नहीं आ सकी है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भीड़भाड़ और भागदौड़ के बीच भी इंसानियत आज जिंदा है।
















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