इंदौर में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब एक गंभीर जन-समस्या बन चुका है. हाल ही में एक ही कुत्ते द्वारा आठ लोगों को काट लिया गया. अब लोग गलियों में बाइक से निकलने में भी डरने लगे है. कोर्ट ने भी इस मामले में सख्त रुख अपना लिया है और नगर निगम को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है.
हाल ही में LIG से लगे नादिया नगर में एक ही कुत्ते ने आठ लोगों को काट लिया. इलाके के लोगों ने बताया कि यहां 40 से 50 कुत्तों ने उनकी नाक में दम कर रखा है. नगर निगम से कई बार शिकायत की जा चुकी है. लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई. निगम वाले हर बार ‘आजकल’ कहकर बात टाल देते है.
रहवासी लक्ष्मण वर्मा ने बताया कि वह एक कुत्ते की मदद करने जा रहे थे. जिसके मुंह से खून निकल रहा था. लेकिन तभी वह उन पर झपटा और उन्हें काट लिया. कुत्ता इतना आदमखोर था कि कई लोगों के छुड़ाने पर भी उसने नहीं छोड़ा और हाथ का मांस तक खींच लिया. इसी कुत्ते ने पड़ोस में करीब 7 साल के बच्चे को भी पैर पर काटा. जिससे उसका भी मांस निकल गया.
एक बुजुर्ग ने नगर निगम पर गुस्सा जताते हुए लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्हें 3 बार कुत्ता काट चुका है. लाल अस्पताल में कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए लोगों की भीड़ है. लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा है. शहर के एमवाय अस्पताल में हर दिन औसतन 100 से 150 लोग रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे है. इनमें से कई मामले गंभीर होते है.
जनता की बढ़ती नाराजगी और शिकायतों के बाद हाईकोर्ट ने इस पर सख्त नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने नगर निगम और संबंधित प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए है कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए एक ठोस कार्ययोजना पेश की जाए. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजों पर नसबंदी दिखाने से काम नहीं चलेगा. जमीन पर इसके नतीजे दिखने चाहिए.







