इंदौर : अरावली पहाड़ों पर पेड़ों की कटाई के विरोध की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अब इंदौर के रीगल चौराहे पर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत पेड़ों की कटाई का विरोध हो रहा है. रीगल चौराहे पर स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय (पूर्व SP ऑफिस) और आसपास के क्षेत्र से करीब 235 पेड़ों को काटने या शिफ्ट करने का प्रस्ताव है. जिसका जमकर विरोध हो रहा है.
पिछले 12 दिनों से यहां प्रदर्शन कर रहे जनहित पार्टी के अभय जैन ने कहा कि यह इंदौर के मध्य का इकलौता इतना हराभरा क्षेत्र है. जहां लोग सुकून से बैठते है. यहां रोजाना हजारों तोते और अन्य पक्षियों का बसेरा है. अगर पेड़ कट गए तो ये सब कहां जाएंगे? ये दशकों पुराने पेड़ है. जिनमें कई विशाल बरगद और पीपल के वृक्ष शामिल है. ये न केवल ऑक्सीजन देते है बल्कि शहर के तापमान को भी नियंत्रित करते है. मेट्रो के नाम पर इतने पेड़ काटने का क्या औचित्य है?
पेड़ों की कटाई को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा है. नगर निगम से लेकर चौराहे तक धरना दिया जा चुका है. नगर निगम आयुक्त, कमिश्नर, कलेक्टर, महापौर, सांसद और मंत्री सभी को ज्ञापन सौंपा जा चुका है. लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं मिला है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन जहां भी ट्रांसप्लांट की बात करता है. वहां पर पेड़ अधिकतर मर जाते है. इसलिए इसका कोई औचित्य नहीं है. मेट्रो स्टेशन की जगह बदली जा सकती है.
इससे पहले भी इंदौर में वर्षों से हुकुमचंद मिल परिसर के 5000 पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठा था. जिन्हें काटकर वहां बिल्डिंग्स बननी थी. लेकिन इंदौरवासियों ने इसका जमकर विरोध किया था और मामला NGT कोर्ट तक गया. जहां से इस पर स्टे लगा हुआ है. प्रशासन पर दबाव है कि वह मिल की जमीन पर बनने वाले प्रोजेक्ट के लेआउट में बदलाव करे ताकि कम से कम पेड़ों की बलि चढ़े.
जबकि मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए एक निश्चित गहराई और जगह की जरूरत होती है. तकनीकी रूप से एलाइनमेंट बदलना मुश्किल है क्योंकि मेट्रो की टर्निंग रेडियस और सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है. फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं कि या तो पेड़ों की कटाई न की जाए या फिर मेट्रो स्टेशन को आगे शिफ्ट किया जाए.







