मंदसौर। देश के प्रमुख अफीम उत्पादक अंचल के किसानों को साधने के लिए केंद्र सरकार ने आखिरकार चालू सीजन की बहुप्रतीक्षित अफीम नीति जारी कर दी है। नई नीति के अनुसार, पिछले 28 सालों से अफीम लाइसेंस का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत देते हुए फिर से पट्टे जारी कर दिए गए हैं। वर्ष 1998 से 2004 तक की नीति के तहत विभिन्न कारणों से काटे गए अफीम पट्टों में सरकार ने इस बार विशेष रियायत दी है। इस नई नीति के लागू होने से करीब 10,500 नए किसानों की संख्या अफीम उत्पादन के लिए बढ़ गई है, जिससे मध्य प्रदेश और राजस्थान के अफीम अंचल में खुशी की लहर दौड़ गई है।
📊 दो वर्गों में बांटी गई अफीम नीति: 4.4 मार्फिन वाले किसानों को 10 आरी और कम औसत वालों को मिली सीपीएस पद्धति की अनुमति
वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित नई नीति के तहत अफीम बुवाई के लिए किसानों को दो प्रमुख वर्गों में बांटा गया है। पहले वर्ग में वे किसान शामिल हैं जिन्होंने पिछले साल 4.4 मार्फिन की औसत से अफीम गोंद की तुलाई नारकोटिक्स विभाग को की थी, जिन्हें चालू सीजन में 10 आरी रकबे के पट्टे दिए गए हैं। वहीं, दूसरी श्रेणी में वे किसान हैं जो 4.4 से नीचे और 3.0 प्रतिशत मार्फिन ग्रेड तक की अफीम तौल कराने में सफल रहे, जिन्हें ‘सीपीएस पद्धति’ से अफीम उत्पादन की अनुमति दी गई है। ये किसान पांच आरी रकबे में फसल बो सकेंगे और डोडा-पोस्त प्राप्त कर सकेंगे।
💰 सवा लाख के पार पहुंचे अफीम लाइसेंस धारक: सांसद सुधीर गुप्ता के प्रयासों से मिली राहत, किसानों ने की भाव बढ़ाने की मांग
मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी से चर्चा के बाद किसानों के हित में यह रियायती नीति बनाई गई है। इसके तहत नारकोटिक्स विभाग द्वारा घोषित औसत में 2 किलोग्राम की रियायत दी गई है। वर्तमान में देश भर में अफीम लाइसेंस धारकों का आंकड़ा बढ़कर सवा लाख तक पहुंच गया है। हालांकि, स्थानीय किसानों ने सरकार से अफीम के सरकारी भाव बढ़ाने और पोस्त भूसे की खरीद का निर्णय लेने की भी मांग की है, लेकिन नई नीति से किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
