कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर से बीजेपी-जेडीयू सरकार पर हमला बोला है. राहुल ने कहा है कि कुछ दिनों पहले बिहार के युवाओं से मेरी बातचीत हुई थी. बातचीत का मुद्दा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार था. राज्य में इन सबकी दुर्दशा के लिए केवल बीजेपी-जेडीयू सरकार गुनहगार है. उन्होंने कहा है कि बिहार के युवा बखूबी जानते हैं कि पिछले 20 सालों में किस तरह से इस मोदी-नीतीश सरकार ने युवाओं की आकांक्षाओं का गला घोंटा है. प्रदेश को लावारिस छोड़ दिया है और हर पैमाने पर गर्त में धकेल दिया है.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कुछ आंकड़े भी शेयर किए हैं. इन आंकड़ों में दावा किया गया है कि देश में शिक्षा के मामले में बिहार का कौन सा स्थान है और किस तरह से नीचे गिरा है. इसी तरह से रोजगार और स्वास्थ्य के मुद्दे को लेकर भी आंकड़े शेयर किए हैं. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आईना हैं – वो rear-view mirror जो दिखा रहा है कि ये ‘डबल इंजन’ बिहार को प्रगति से कितना पीछे खींच लाई है.
शिक्षा
कक्षा 910 में ड्रॉपआउट दर: 27वां स्थान (29 राज्यों में) कक्षा 1112 में नामांकन दर: 28वां स्थान (29 राज्यों में) महिला साक्षरता: 28वां स्थान (29 राज्यों में)
रोज़गार
सेवा क्षेत्र में रोजगार: 21वां स्थान (29 राज्यों में) उद्योग-उत्पादन क्षेत्र में रोजगार: 23वां स्थान (29 राज्यों में)
स्वास्थ्य
शिशु मृत्यु दर: 27वां स्थान (29 राज्यों में) बीमा योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा: 29वां स्थान (29 राज्यों में) घर में शौचालय की सुविधा: 29वां स्थान (29 राज्यों में)
मानव विकास
मानव विकास सूचकांक (HDI): 27वां स्थान (27 राज्यों में) प्रति व्यक्ति आय (NSDP): 25वां स्थान (25 राज्यों में)
राहुल गांधी ने कहा कि मैं बिहार में जितने भी युवाओं से मिला हूं सभी बेहद होनहार और समझदार हैं. युवा अपनी काबिलियर और मेहनत के बल पर हमर जगह चमक बिखेर सकते हैं पर सरकार ने उन्हें अवसरों की जगह सिर्फ बेरोजगारी और निराशा दी है. उन्होंने कहा कि अब वक्त बदलाव का है. बिहार का स्वाभिमान फिर जगाने का वक्त है. वक्त है महागठबंधन का न्याय संकल्प दोहराने का है.
बिहार चुनाव के लिए महागठबंधन ने जारी किया घोषणा पत्र
बिहार चुनाव के लिए मंगलवार को महागठबंधन ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है. घोषणा पत्र को ‘तेजस्वी प्रण’ नाम दिया गया है. वादा किया गया है कि राज्य में महागठबंधन की सरकार बनने के 20 दिन के भीतर नौकरी को लेकर अधिनियम लाया जाएगा और 20 महीने के भीतर नौकरी देना शुरू कर देंगे. इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य के मुद्दे को लेकर भी कई बड़े वादे किए गए हैं.
















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