जबलपुर। भेड़ाघाट के प्रसिद्ध चौसठ योगिनी मंदिर से आसपास बढ़ते अतिक्रमण पर हाईकोर्ट ने नाराजगी बयां की और इन्हें हटाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए भेड़ाघाट नगर परिषद को निर्देशित किया कि वे मंदिर के 100 मीटर दायरे में आने वाले सभी अतिक्रमण का सर्वे कर, इन्हें हटाए। नगर परिषद ने 100 मीटर की परिसीमा में करीब 114 अतिक्रमण आ रहे हैं। इनमें लगभग 100 घर हैं और 10 दुकान व चार होटलें भी शामिल हैं।
इतना ही नहीं चार होटलों में से एक एमपी टूरिज्म की होटल का भी कुछ हिस्सा है। नगर परिषद प्रशासन ने सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस थमा दिया है और 10 दिन का समय दिया है। इस समयावधि के भीतर खुद से अतिक्रमण हटाने है और ऐसा न करने पर प्रशासन बलपूर्वक हटाया। नगर परिषद के सीएमओ के मुताबिक 19 जनवरी को यह समय सीमा खत्म हो जाएगी। 20 जनवरी से अतिक्रमण की नपाई और हटाने की कार्रवाई शुरू होगी।
नोटिस से हड़कंप, कुछ हटा रहे-कुछ डटे
नगर परिषद द्वारा जारी किए गए नोटिस से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सालों से मंदिर परिसर के 100 मीटर के दायरे में घर, दुकान, होटल और अन्य संस्थान बन गए, लेकिन अब तक इन्हें हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। अब तक हाईकोर्ट ने इन अतिक्रम को संज्ञान में लिया है तो नगर परिषद ने लेकर क्षेत्रीय राजनेता सक्रिए हो गए हैं।
परिषद के मुताबिक इससे पूर्व भी में सर्वे ऑफ इंडिया ने मंदिर परिसर के आसपास खड़े हो गए अतिक्रमण का सर्वे किया था, जिसमें करीब 114 अतिक्रमण आए थे। इन्हें हटाने की कार्रवाई कागजों से बाहर नहीं आ सकी। हालांकि दूसरी ओर नगर परिषद के पूर्व में किए गए सर्वे में करीब 284 अतिक्रमण आए, लेकिन इन्हें नोटिस नहीं दिया है। नोटिस में सर्वे आफ इंडिया द्वारा चिंहित किए गए अतिक्रमण को रखा है।
पुरातत्व की जमीन, सालों से जमे
चौसठ योगनी मंदिर और इसके आसपास कई एकड़ जमीन पुरातत्व विभाग की है। अधिकांश जमीन खाली होने की वजह से इन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण बस गए। देखते ही देखते कई मंजिल मकान, दुकान यहां तक की होटलें खोल दी गई है। अब इन्हें हटाने के लिए हाईकोर्ट सख्त है। जिला प्रशासन ने भी कोर्ट के आदेश के परिपालन में परिषद को निर्दशित कर दिया है।
हालांकि नोटिस सिर्फ 114 लोगों को दिया गया है। यह वे अतिक्रमण हैं, जो हाल ही में हुए। इनमें भेड़ाघाट परिषद के करीब दो वार्ड आते हैं। इस वजह से क्षेत्रीय राजनीति गर्म हो गई है। नेता, वोट बचाने के लिए अतिक्रमण हटाने का विरोध कर रहे हैं।
मंदिर के इतिहास पर नजर
भेड़ाघाट का चौसठ योगिनी मंदिर भारत के प्राचीन एवं रहस्यमय मंदिरों में से एक है। यह मंदिर तंत्र साधना, शक्ति उपासना और योगिनी परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। संगमरमर की चट्टानों पर स्थित यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के शासक युवराज देव प्रथम के शासनकाल में हुआ माना जाता है।
मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट पत्थरों से किया गया है और यह पूर्णतः वृत्ताकार (गोलाकार) शैली में निर्मित है, जो इसे अन्य मंदिरों से विशिष्ट बनाती है। मंदिर की परिक्रमा में कुल 64 योगिनियों की मूर्तियां स्थापित थीं, जो शक्ति के विविध रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। वर्तमान में इनमें से कई मूर्तियां खंडित अवस्था में हैं या संग्रहालयों में सुरक्षित रखी गई हैं।
19 जनवरी तक का समय दिया गया
नगर परिषद ने चौसठ योगिनी मंदिर के आसपास बचे 114 अतिक्रमण चिह्नित किए हैं। इन्हें हटाने के लिए नोटिस भी दे दिए गए हैं। 19 जनवरी तक का समय दिया गया है। न हटाने वालों के अतिक्रमण को परिषद द्वारा खुद हटाया जाएगा।
















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