मुंबई-अहमदाबाद एक्सप्रेस हाईवे की खस्ताहाल स्थिति ने एक मासूम की जान ले ली. नायगांव चिंचोटी के गैलेक्सी अस्पताल में इलाज करा रहे 16 महीने के बच्चे को आगे के इलाज के लिए मुंबई ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में 5 घंटे तक ट्रैफिक जाम में फंसे रहने के कारण बच्चे ने दम तोड़ दिया. यह दर्दनाक घटना कल रात हुई. डॉक्टरों ने बच्चे को बेहतर इलाज के लिए मुंबई रेफर किया था. परिजन बच्चे को निजी वाहन से मुंबई ले जा रहा था.
वसई-दहिसर तक 20-30 किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम में गाड़ी अटक गई. रास्ते में ही बच्चे की हरकतें बंद हो गईं. इसके बाद परिवार के लोग उसे सासूनघर के एक छोटे अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. परिजनों ने हाईवे की खस्ताहाल और ट्रैफिक जाम की वजह से बच्चे की मौत पर आक्रोश जताया है. वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि ये सड़क मौत का जाल बन गई है. यहां हर दिन 20 से 30 किलोमीटर लंबा जाम लगता है.
जाम और गड्ढों से तबाह हाईवे
मुंबई-अहमदाबाद एक्सप्रेस वे पर रोजाना 20 से 30 किलोमीटर तक जाम देखने को मिलता है. कारण है, हाईवे की खराब हालत और जगह-जगह गड्ढे होना. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस हाईवे पर 600 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन खस्ताहाल सड़कों ने आम लोगों की जिंदगी खतरे में डाल दी है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हाईवे पर लगातार बढ़ रहे हादसों और जाम के कारण यह सड़क मौत का जाल बन चुकी है. लोगों में गहरी नाराजगी और आक्रोश देखाजारहाहै.
NHAI ने मरम्मत में खर्च किए थे 600 करोड़
लोगों ने कहा कि हाल ही में इस हाईवे के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस हाईवे पर 600 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन हालत जस की तस बनी हुई है. हाईवे की खस्ताहाल ने लोगों की जिंदगी खतरे में डाल दी है. हर रोज यहां 20 से 30 किलोमीटर तक के लंबे जाम का सामना करते हैं. यह सड़क राहगीरों के लिए मौत का जाल बन चुकी है.
















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