मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत को उजागर करने वाला एक मामला सामने आया है. गर्भवती महिला को प्राइवेट अस्पताल रेफर करने के नाम पर 18 हजार रुपये में डील करने का आरोप लगा है. महिला की हालत में सुधार न होने पर जब उसे दोबारा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पूरे मामले की पोल खुल गई. आरोपी है कि ये दोनों अस्पताल की मिलीभगत थी.
दरअसल, जानकारी के अनुसार रायपुर, चंदला की रहने वाली रचना नाम की महिला को 9 जनवरी की शाम करीब 5 बजे अस्पताल ले जाया गया था. महिला प्रेग्नेंट थी और लेबर पेन के चलते उसके परिजन उसे जिला अस्पताल छतरपुर लेकर गए थे. परिजन का आरोप है कि लेबर रूम में मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद यह कह दिया कि महिला के पेट में बच्चा मर चुका है.
रेफर करने के लिए 18 हजार में डील
आरोप है कि इसके बाद जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर साक्षी ने यह कहते हुए कि अस्पताल में बहुत भीड़ है और अच्छा इलाज मुमकिन नहीं होगा. महिला के परिजन को उसे प्राइवेट अस्पताल ले जाने की सलाह दी. परिजनों का कहना है कि रेफर करने के बदले उनसे 18 हजार रुपये में डील की गई. डॉक्टर के कहने पर परिजन उसी दिन शाम करीब 6 बजे महिला को एक प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां इलाज के बावजूद महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ.
दोबारा जिला अस्पताल में कर लिया भर्ती
जब हालत लगातार बिगड़ती गई तो परिजन मजबूरन फिर से 10 जनवरी की सुबह करीब 10 बजे महिला को दोबारा जिला अस्पताल लेकर आ गए, जहां उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया. महिला के दोबारा जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद जिला अस्पताल और प्राइवेट अस्पताल की मिलीभगत पर सवाल खड़े हो गए. परिजनों ने कहा कि अगर जिला अस्पताल में इलाज मुमकिन नहीं था तो फिर मरीज को दोबारा वहीं क्यों भर्ती किया गया. पीड़ित परिजनों ने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने और दोषी डॉक्टरों, उसी प्राइवेट अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. वहीं केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि में CMHO से बात करता हूं और मामले की जांच करवाता हूं.
















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