प्रशासन की मामूली कार्रवाई, बड़े मामले पर लीपापोती!
दर्शन के नाम पर सक्रिय था संगठित गिरोह
उज्जैन: जिस तरह पहले महाकाल मंदिर में दर्शन के नाम पर पैसों की खुलेआम धंधेबाजी सामने आई थी और मामले के उजागर होते ही आरोपियों की लंबी श्रृंखला सामने आने लगी थी, ठीक वैसा ही मामला अब काल भैरव मंदिर में उजागर हुआ है।
सूत्रों के अनुसार काल भैरव मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर लंबे समय से बड़ा गोरखधंधा चल रहा था। मंदिर में भीड़ बढ़ते ही कुछ लोगों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया और मोटी रकम वसूल कर दर्शन कराने का खेल शुरू हो गया।
आज एक व्यक्ति दर्शन के नाम पर रुपए वसूलते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपने अन्य साथियों के नाम भी बताए, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि मुख्य आरोपी तक पुलिस नहीं पहुंच पाई। बताया जा रहा है कि यदि “मोटी मछली” पकड़ में आ जाती, तो शासन-प्रशासन की किरकिरी तय थी।
जानकारी के अनुसार इस मामले में पुलिस ने करीब 8 लोगों को मामूली धाराओं में गिरफ्तार किया है, जिन्हें फूल विक्रेता बताया जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि
👉 इनके तार मंदिर के किन-किन जिम्मेदारों से जुड़े थे?
👉 असली मास्टरमाइंड कौन है?
प्रशासन की खानापूर्ति वाली कार्रवाई ने एक गंभीर और बड़े घोटाले को दबाने का काम किया है।
अब यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या उज्जैन में दर्शन के नाम पर धंधा सभी प्रमुख मंदिरों में चल पड़ा है?
और क्या बड़े मगरमच्छों पर इसलिए कार्रवाई नहीं होती क्योंकि वसूली की रकम का हिस्सा “ऊपर तक” पहुंचता है?
बिना किसी बड़े संरक्षण के क्या ऐसा धंधा लंबे समय तक चल सकता है?
यह सवाल आज हर श्रद्धालु के मन में है।

















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