इंदौरी नाश्ते में हमेशा पोहे जलेबी का जिक्र होता है. लेकिन एक और नाश्ता है जो न केवल स्वादिष्ट है बल्कि पेट भी भरता है. हम बात कर रहे है दाल पकवान की. जिसमें एक बड़ी सुनहरी पूरी जैसी डिस्क पर गरमा-गरम गाढ़ी और खुशबूदार चने की दाल डाली जाती है और ऊपर से बारीक कटा प्याज, तीखी हरी चटनी, खट्टी-मीठी इमली की चटनी और इंदौरी सेंव इसे और भी लाजवाब बना देते है.
दाल पकवान दिखने में साधारण लग सकता है. लेकिन इसे खाने से पेट भर जाता है. इसमें दो चीजें होती है. पहली, मैदे का पकवान जिसे अजवाइन और जीरे के साथ गूंथा जाता है. इसे पतला बेलकर कांटों से छेद किया जाता है और फिर तला जाता है, ताकि यह फूले नहीं और पापड़ जैसा कुरकुरा रहे. दूसरी चीज होती है दाल. जिसमें चने और मूंग की दाल का उपयोग किया जाता है. इसकी खासियत है कि यह पूरी तरह गली नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके दाने खड़े दिखने चाहिए ताकि दबाने पर मक्खन की तरह मैश हो जाए. इस दाल में झोंक नहीं लगाया जाता, बल्कि केवल उबालकर सामान्य और सेंधा नमक डाला जाता है.
इंदौर में दाल पकवान में इंदौरी टच होता है. यहां नाश्ते की दुकानों पर इसे सेंव और जीरावट डालकर परोसा जाता है. इस पर छोटे-छोटे प्याज और थोड़ी कटी हुई हरी मिर्च भी डाली जाती है. जिससे इसका स्वाद अनोखा हो जाता है. इंदौर के ठेले वाले इसमें पुदीने और धनिये की खास पतली चटनी डालते है.
इंदौर के सिंधी कॉलोनी में आपको सबसे अच्छा दाल पकवान मिल जाएगा. गुरुकृपा और साइन राम जैसे आउटलेट्स पर सुबह-सुबह काफी भीड़ होती है. इसके अलावा सपना संगीता और 56 दुकान पर भी दाल पकवान की दुकानें मिल जाएंगी. यहां 30 रुपए से लेकर 60 रुपए तक में दाल पकवान की प्लेट मिलती है.
दाल पकवान कभी रॉयल ब्रेकफास्ट माना जाता था. जिसे राजा-महाराजा ही खाते थे. लेकिन बाद में यह आम लोगों में भी लोकप्रिय हो गया. विशेष तौर पर यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत का व्यंजन है. लेकिन वहां से सिंधी जब देश के अन्य हिस्सों में बसे तो इसे लोगों ने अपना लिया. इंदौर ने इसे असली पहचान दी और यहां के फ्लेवर ने इसे विश्वभर में प्रसिद्ध कर दिया.
















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