मध्य प्रदेश के इंदौर की सड़कों पर भिक्षावृत्ति की एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है. सराफा क्षेत्र में सालों से भीख मांगने वाला भिखारी धनकुबेर निकला, जिसके पास 3 मकान, तीन ऑटो और एक कार है. भिखारी की पहचान मांगीलाल के रूप में हुई है. महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत जब मांगीलाल का रेस्क्यू किया गया तो उसकी हकीकत जानकर अधिकारी भी हैरान रह गए.
तीन घर, तीन ऑटो और एक कार
रेस्क्यू टीम के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा के मुताबिक मांगीलाल के पास शहर के अलग-अलग इलाकों में तीन पक्के मकान हैं. भगत सिंह नगर में उसका 16 बाय 45 फीट का तीन मंजिला मकान है. इसके अलावा शिवनगर में 600 स्क्वायर फीट का दूसरा पक्का मकान और अलवास में 10 बाय 20 फीट का एक बीएचके मकान भी उसके नाम पर है. अलवास का मकान शासन ने रेड क्रॉस की मदद से विकलांगता के आधार पर दिया गया था. इतना ही नहीं, मांगीलाल के पास तीन ऑटो हैं, जिन्हें वह किराए पर चलाता है. इसके साथ ही उसके पास एक डिजायर कार भी है, जिसे चलाने के लिए उसने ड्राइवर तक रखा हुआ है.
सर्वे में सामने आए 6500 भिखारी
वह अलवास में अपने माता-पिता के साथ रहता है, जबकि उसके दो भाई अलग रहते हैं. जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने बताया कि इंदौर में फरवरी 2024 से भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान चलाया जा रहा है. शुरुआती सर्वे में 6500 भिखारी सामने आए थे, जिनमें से 4500 की काउंसलिंग कर भिक्षावृत्ति छुड़ाई गई. 1600 भिक्षुकों को रेस्क्यू कर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा गया, जबकि 172 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भिक्षावृत्ति करने वालों और इसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
















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