धर्म नगरी आस्था का प्रमुख केंद्र उज्जैन देशभर में बाबा महाकाल की नगरी के रूप में विख्यात है. यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस पावन नगरी में भगवान शिव के साथ-साथ शक्ति के विविध स्वरूप भी विराजमान हैं. माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है. ऐसे में उज्जैन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए जाते हैं. इस अवसर पर हम आपको उज्जैन शहर के चार ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका नवरात्रि में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.
महाकालेश्वर मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित मां हरसिद्धि का मंदिर उज्जैन की प्रमुख धार्मिक पहचान है. यह मंदिर देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है और इसकी आस्था दूर-दूर तक फैली हुई है. मान्यता है कि मां हरसिद्धि सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी थीं, जिनकी कृपा से उन्हें अद्भुत शक्ति और न्यायप्रियता प्राप्त हुई.
नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजन और साधना की जाती है. यह मंदिर तंत्र साधना के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां साधक सिद्धि की कामना से विशेष अनुष्ठान करते हैं. मां हरसिद्धि भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.
धार्मिक नगरी उज्जैन तीर्थों की तीर्थ स्थली के रूप में प्रतिष्ठित है. पुराणों में ऐसी मान्यता है कि उज्जैन ही ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां 33 कोटि देवी-देवता विराजमान हैं. ऐसा ही एक मंदिर चामुंडा माता चौराहे पर मां छतेशवरी चामुंडा मंदिर नाम से प्रसिद्ध है. यहां पांच मंगलवार दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है.
उज्जैन में स्थित यह मंदिर 64 योगिनी माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां देशभर से तंत्र साधक अपनी साधना को सिद्ध करने के लिए पहुंचते हैं. इसी कारण इस मंदिर को ‘तांत्रिकों का विश्वविद्यालय’ भी कहा जाता है. यह स्थान विशेष रूप से गुप्त और शक्तिशाली साधनाओं के लिए जाना जाता है. गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते हैं. इस दौरान श्रद्धालु और साधक बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए आते हैं और योगिनी माताओं से शक्ति, सिद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
गुप्त नवरात्रि में देवियों में तंत्र साधना के लिए मां कालिका को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. गढ़कालिका के मंदिर में मां कालिका के दर्शन के लिए रोज हजारों भक्त आते हैं. नवरात्रि में गढ़कालिका देवी के दर्शन मात्र से ही अपार सफलता मिलती है. यह मंदिर भैरवगढ़ में स्थित है.
महाकाल की नगरी में ही शिप्रा नदी के पास भूखी माता के नाम से विख्यात यह मंदिर है. बताया जाता है कि इस मंदिर में पहले नरबलि दी जाती थी लेकिन अब यहां मन्नत पूरी करने के लिए पशुओं की बलि दी जाती है. भक्त दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं. नवरात्रि में तो यहां भक्तों का जनसैलाब देखने को मिलता है.
















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