कभी न कभी चक्कर आ जाना एक सामान्य बात है, ये कमजोरी या बीपी के नीचे- ऊपर होने से भी हो सकता है, लेकिन अगर अकसर चक्कर आते हैं तो ये वर्टिगो की बीमारी हो सकती है. हालांकि लोग इसको नजरअंदाज कर देते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि वर्टिगो की बीमारी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है. उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम और बढ़ जाता है. 60 साल से ऊपर के व्यक्ति में यह खतरनाक भी हो सकता है.
वरिष्ठ न्यूरोटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अनिर्बन बिस्वास बताते हैं कि वर्टिगो को एक संतुलन विकार माना जाता है. इसके मरीज अक्सर चार से सात अलग-अलग विशेषज्ञों के चक्कर काटते हैं और महंगे एमआरआई व सीटी स्कैन कराते हैं, जिनका उनकी असली समस्या से कोई सीधा संबंध नहीं होता. एमआरआई कराने के बाद भी चक्कर आने की समस्या का सही कारण नहीं चल पाता है.
सही इलाज न मिलने से यादादश्त हो सकती है कमजोर
डॉ. अनिर्बन बिस्वास कहते हैं कि वर्टिगो की समस्या का अगर सही इलाज न हो तो ये डिप्रेशन, याददाश्त की कमजोरी का कारण बन जाती है, जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है. ऐसे में जरूरी है कि चक्कर आने की समस्या को हल्के में न लें और इसका सही इलाज कराएं.
कैसे पहचानें की सामान्य सिरदर्द है या वर्टिगो है?
सामान्य सिरदर्द में सिर में दबाव, भारीपन या दर्द महूसस होता है, लेकिन वर्टिगो में ऐसा लगता है कि सिर और पूरा शरीर ही घूम रहा है.सिर का दर्द माथे, कनपटी या सिर के पीछे महसूस होता है, लेकिन वर्टिगो में चक्कर बढ़ता रहता है औकर चलने से शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है. वर्टिगों में चक्कर के साथ मतली, उल्टी या पसीना आता है और कान में भी दर्द महसूस होता है.
















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