छतरपुर : छतरपुर में एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां प्रशासन की नाक के नीचे शहर के सबसे संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्र सर्किट हाउस पहाड़ पर खुलेआम अतिक्रमण का बड़ा खेल चल रहा है। समुद्र तल से 184 मीटर और शहर के मुख्य मार्ग से करीब 100 मीटर ऊंचाई पर स्थित सर्किट हाउस के आसपास हाउसिंग बोर्ड द्वारा 1984 में बनाए गए 61 मकानों के मालिकों ने पहाड़ को खोदकर 3 से 4 हजार वर्गफुट तक अवैध अतिक्रमण कर लिया है।
हैरानी की बात यह है कि यह अतिक्रमण उस क्षेत्र में हो रहा है, जहां से रोज़ाना प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और वीआईपी गुजरते और ठहरते हैं, बावजूद इसके कार्रवाई के नाम पर प्रशासन पूरी तरह मौन नजर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1984 में जूनियर HIG (9×14.60 वर्गफुट) के 7 मकान, MIG (25×56 वर्गफुट) के 22 मकान, 25×48 वर्गफुट के 32 मकान, मामूली कीमतों पर आवंटित किए थे। इन मकानों की मरम्मत अवधि 30 वर्ष तय थी, लेकिन मरम्मत की आड़ में पहाड़ को खोदकर सुरंगनुमा निर्माण कर लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जिन मकानों की कीमत कभी नाममात्र थी, वही आज 50 से 75 लाख रुपए में खुलेआम बेचे जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई मकान प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदारों द्वारा खरीदे गए हैं, जिसके चलते कार्रवाई ठंडे बस्ते में है।
पूर्व में जब शिकायतें सामने आईं, तब प्रशासन ने सर्किट हाउस के किनारे बाउंड्री लाइन बनवाकर औपचारिकता निभा दी, लेकिन अब उसी बाउंड्री के ऊपर से अतिक्रमण जारी है। गरीबों के कच्चे मकानों पर बुलडोजर चलाने वाला प्रशासन, इस हाई-प्रोफाइल अतिक्रमण पर आंखें मूंदे बैठा है।
संबधित अधिकारी बोले..
इस संबंध में कार्यपालन यंत्री एम.एल. अहिरवार ने कहा कि “हाउसिंग बोर्ड ने 1984 में मकान बनाकर सौंप दिए थे, अब अतिक्रमण का मामला राजस्व विभाग देखेगा।” (एम.एल.अहिरवार, कार्यपालन यंत्री, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल)
SDM बोले..
वहीं अनुविभागीय अधिकारी अखिल राठौर का कहना है कि “मामला संज्ञान में है, जल्द ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
















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