डिंडौरी। आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी में सरकारी स्कूल में अध्ययनरत बच्चों को हाथ जोडकर स्कूल संचालन के लिए नया भवन बनाने की गुहार करनी पड रही है। आलम यह है कि जिले के मेहंदवानी जनपद अंतर्गत ग्राम भोडासाज के नेटीटोला में सरकारी प्राइमरी स्कूल घासफूस की झोपडी में मजबूरन संचालित की जा रही है। डेढ वर्ष से बच्चे भवन की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई प्रस्ताव भेजने पर ही अटकी हुई है। गांव में स्कूल संचालन के लिए भवन न होने से कई बच्चों ने इस वर्ष स्कूल में दाखिला भी नहीं कराया है।
अगस्त 2024 में तोड दिया गया था स्कूल भवन
- कक्षा पहली से पांचवी कक्षा तक में इस समय कुल 37 बच्चे अध्यनरत है। यहां एक नियमित शिक्षक के साथ एक अतिथि शिक्षक भी अपनी सेवाए दे रहे है।
- ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त 2024 को शहपुरा एसडीएम के आदेश से जर्जर भवन होने के कारण भवन को तुड़़वा दिया गया था।
- भवन को टूटे लगभग डेढ वर्ष से हो गए, लेकिन नए भवन की व्यवस्था नहीं हो पाई। ऐसी स्थिति में बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
- ग्रामीणों ने एक जुलाई 2025 को जनसुनवाई में भी शिकायत की थी। इसके बाद तत्कालीन डीपीसी को शिकायत पत्र अग्रिम कार्यवाही के लिए भेज दिया गया था।
- उस शिकायत पर भी कई महीना बीत जाने के बाद कोई पहल नहीं हो पाई। 20 अगस्त 2025 को सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग से भी शिकायत की गई थी। वह पत्र भी ठंडे बस्ते में चला गया।
15 वर्षों से जर्जर भवन में संचालित होता रहा स्कूल
- ग्रामीणों ने बताया कि नेटीटोला में स्कूल भवन वर्ष 1999 में बनाया गया था। निर्माण में बरती गई लापरवाही के चलते 2009 में ही भवन जर्जर हो गया।
- 2009 से 2024 तक जर्जर भवन में ही कक्षाएं संचालित होती रहीं। बारिश में छत से पानी टपकना, प्लास्टर गिरना आम बात थी, लेकिन उसके बाद भी विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर अध्ययन कर रहे थे। 2024 में भरी बरसात के दौरान भवन को प्रशासन ने गिरवा दिया।
















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