इंदौर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ(ईओडब्ल्यू) दो करोड़ 56 लाख रुपये के गबन के मामले में मैसर्स लक्ष्य इक्विपेंट एंड इंजीनियरिंग के प्रोपराइटर नेहा तांबी और केनरा बैंक के तत्कालीन मैनेजर पवन कुमार झा सहित चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपितों ने बंधक और एनपीए प्रोपर्टी को गिरवी रख कर ऋण ले लिया था।
एसपी(ईओडब्ल्यू) रामेश्वर यादव के अनुसार मैसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एंड इंजीनियरिंग की इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर(पीथमपुर) में कारोबार है। कंपनी की नेहा तांबी प्रोपराइटर है। उसने शीट मेटल कार्यों और निर्माण के लिए नवलखा शाखा स्थित केनरा बैंक से 170 लाख की ओसीसी लिमिट मांगी थी।
इसमें गारंटर के रूप में नेहा के पति मनीष तांबी ने हस्ताक्षर किए थे। इस ऋण के लिए नेहा और मनीष ने संयुक्त नाम से ओल्ड पलासिया स्थित क्लासिक क्राउन में खरीदे फ्लैट की रजिस्टरी 29 नवंबर 2011 को कोलेटरल बंधक के रुप में रखी। ऋण स्वीकृत होने पर केनरा बैंक के तत्कालीन मैनेजर पवन कुमार झा द्वारा संपति एवं विनिर्माण इकाई का निरीक्षण कर 3 अक्टूबर 2020 को विजिट रिपोर्ट प्रस्तुत की।
मैनेजर ने इस संपत्ति को विवादरहित और बताया और नेहा की पीथमपुर वाली यूनिक को संचालित होना दर्शाया। बैंक के तत्कालीन पैनल वकील विकास कुमार वर्मा ने लीगर स्क्रूटनी रिपोर्ट बनाई और संपत्ति को वैध एंव बंधक योग्य बताया। एसपी के अनुसार ऋण की राशि मैसर्स ब्लू चिप इक्विपमेंट एंड इंजीनियरिंग प्रा.लि. के खाते में ट्रांसफर कर ली गई। इस कंपनी में मनीष तांबी डायरेक्टर है।
पति-पत्नी ने बेचे प्लाट को गिरवी रख कर चपत लगाई
- एसपी के अनुसार जिस फ्लैट को बैंक में गिरवी रखा गया उसको 2007 में ही बिक चुका था।
- यह संपत्ति बैंक आफ इंडिया कंचनबाग में बंधक रखा गया था।
- ऋण की राशि जमा न करने पर बैंक एनपीए घोषित कर फ्लैट को सीज कर चुकी है।
- वकील विकास कुमार और मैनेजर पवन कुमार ने फर्जी दस्तावेज बनाए।
- नेहा और मनीष के साथ मिलकर साजिश की।
- जबकि नेहा की व्यवसायिक यूनिट भी अस्तित्व में नहीं थी।
- ओसीसी खातों में भी संदिग्ध लेनदेन कर ऋण की राशि का डायवर्सन किया गया था।