प्रयागराज माघ मेले में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार और शंकराचार्य के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है. यही वजह है कि प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. मामले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर वॉर भी तेज हो गया है.
पोस्टर में श्रीरामचरितमानस की चौपाई जाको प्रभु दारुण दुख देही, ताकी मति पहले हर लेही का उल्लेख करते हुए पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े किए गए हैं. पोस्टर के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया गया है.
क्या है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इस समय माघ मेले का आयोजन हो रहा है. मौनी अमावस्या के मौके पर प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच का विवाद सामने आया था. यहां प्रशासन की तरफ से पालकी पर गंगा स्नान करने से रोका या था. प्रशासन की तरफ से वहां मौजूद अधिकारियों का साफ तौर पर कहना था कि किसी को भी पालकी से स्नान करने नहीं जाने दिया गया है. आप भी पैदल स्नान करिए.
इसी बात पर प्रशासन और शंकराचार्य के विवाद हो गया. विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई. इसी के बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए थे. शंकराचार्य के धरने पर बैठने के बाद से ही राजनीतिक पारा हाई हो गया. प्रशासन की तरफ से शंकराचार्य होने को लेकर भी सवाल किया गया.
शंकराचार्य के समर्थन में सपा और कांग्रेस
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 6 दिन से माघ मेला में धरने पर बैठे हैं. यही वजह है कि लगातार बयानबाजी हो रही है. सीएम योगी और डिप्टी सीएम की तरफ से भी बयानबाजी की गई है. मामला अब गरमाता जा रहा है. कांग्रेस और सपा लगातार शंकराचार्य के समर्थन में बयान दे रही है. ऐसे में देखना होगा कि आने वाले कितने दिनों तक यह विवाद चलता है.











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