इंदौर: राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले ही कांग्रेस का कलह और गुटबाजी साफ नजर आ रही है। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर कांग्रेस का एक खेमा तो पूरी तरह से बीजेपी पर पूरी तरह से हमलावर है, लेकिन कांग्रेस का दूसरा खेमा इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहा है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी दूरी बनाते ही दिख रहे है।
भागीरथपुरा मामले में एक गुट सक्रिय तो दूसरे नहीं ले रहा रुचि
मतलब साफ है कि मामले में कांग्रेस के भीतर सक्रियता और निष्क्रियता देखी जा सकती है। पार्टी के कई नेता इस मुद्दे पर मुखर है, तो एक धड़ा पूरी तरह गायब है। बात करें अगर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कि तो ये दोनों नेता दौरा कर चुके हैं। और भी कई कांग्रेसी नेता भागीरथपुरा मामले को लेकर मोर्चा खोले हुए हैं लेकिन दूसरा खेमा इससे दूर ही है।
कुछ नेताओं ने खोला है मोर्चा को कुछ बनाए है दूरी
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह, शोभा ओझा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के साथ ही जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े जैसे नेताओं ने मुद्दे को लेकर लगातार मोर्चा खोल रखा है। वहीं दूसरी ओर बात करें तो पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष, अश्विन जोशी, फौजिया शेख अलीम जैसे नेता अभी दिखाई नही दे रहे हैं।
दरअसल इसे अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा माना जा रहा है। वहीं बात अगर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे बडे नेताओं की करें तो ये दोनों नेता भागीरथपुरा नहीं पहुंचे हैं, जबकि इस मुद्दे पर देश तक कोहराम मचा हुआ है। इसी के चलते कांग्रेस की एकता और एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
राहुल गांधी कैलाश के बयान पर उठा चुके हैं सवाल,मांगी है जबावदेही
वहीं भागीरथपुरा मामले पर राहुल गांधी भी मुखर हैं, अब उनके इंदौर आने की अटकलें तेज हैं। कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी इंदौर आकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएं।
















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