विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो (छतरपुर) के 11वीं सदी के ऐतिहासिक जवारी मंदिर से एक बेहद सुखद और सांस्कृतिक महत्व की खबर सामने आई है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान विष्णु की लगभग 7 फीट ऊंची बलुआ पत्थर की प्रतिमा सालों से बिना सिर के (खंडित) स्थापित थी। अब इस ऐतिहासिक प्रतिमा का सिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के खजुराहो स्थित भंडारगृह में मिल गया है।
वैज्ञानिक जांच और मिलान प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अब इस खंडित मूर्ति को उसके मूल स्वरूप में जोड़ने की आधिकारिक तैयारी शुरू कर दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी नवंबर 2026 माह के भीतर यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न कर लिया जाएगा।
🏛️ 11वीं सदी में चंदेल राजाओं ने कराया था जवारी मंदिर का निर्माण
खजुराहो का जवारी मंदिर चंदेलकालीन स्थापत्य और मंदिर कला का एक अद्भुत उदाहरण है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में हुआ था। मंदिर के गर्भगृह में बलुआ पत्थर से निर्मित भगवान विष्णु की बेहद भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी।
हालाँकि, दशकों से प्रतिमा का धड़, चारों भुजाएं और पैर तो मौजूद थे, लेकिन सिर गायब था। मूर्ति संरक्षित फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश दलाल लंबे समय से इस ऐतिहासिक प्रतिमा के संरक्षण और इसके लापता सिर को पुनः स्थापित कराने के लिए मुहिम चला रहे थे।
🔍 पुरानी तस्वीरों, पत्थर की बनावट और मुकुट के आधार पर ASI ने की पहचान
एएसआई (ASI) के विशेषज्ञों और पुरातत्वविदों ने प्रतिमा की पुरानी तस्वीरों से भंडारगृह में रखे सिर का मिलान किया।
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पहचान के मुख्य आधार: पत्थर की विशेष रासायनिक संरचना, रंग, शारीरिक अनुपात और भगवान विष्णु के मुकुट की अद्भुत कलात्मक बनावट के आधार पर यह पुष्टि हुई कि यह सिर जवारी मंदिर की इसी विष्णु प्रतिमा का है।
मूर्ति संरक्षित फाउंडेशन के चेयरमैन राकेश दलाल ने बताया कि इस खोए हुए सिर की खोज और पुनरुद्धार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लंबा संघर्ष लड़ा गया। इसके लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन और खजुराहो में सांस्कृतिक अभियानों के जरिए जन-जागरूकता फैलाई गई थी।
🪔 सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला; कार्तिक पूर्णिमा पर ‘एक दीप, एक संकल्प’ अभियान की तैयारी
प्रतिमा के संरक्षण की मांग को लेकर फाउंडेशन ने सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की थी। अब सिर मिल जाने और बहाली की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर जवारी मंदिर में ‘एक दीप, एक संकल्प’ अभियान के तहत दीप प्रज्वलित करने की अनुमति मांगी गई है। इस आयोजन का उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को इस प्राचीन धरोहर के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

