हिंदू पंचांग में प्रत्येक तिथि और प्रत्येक वार का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इन्हीं में से एक है एकादशी तिथि, जो हर महीने दो बार आती है. एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में, हर एकादशी का अपना अलग फल और प्रभाव होता है, लेकिन पूरे वर्ष में आने वाली 24 एकादशियों में जया एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं. कहा जाता है कि यह व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है.
इस वर्ष जया एकादशी के अवसर पर एक विशेष शुभ संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है. ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण यह एकादशी साधना और पूजा के लिए बेहद फलदायी मानी जा रही है. तो आइए जानते हैं, उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज से जया एकादशी की सही तिथि और व्रत के श्रेष्ठ मुहूर्त की पूरी जानकारी.
जया एकादशी का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026, बुधवार की शाम 4 बजकर 35 मिनिट से प्रारंभ होकर अगले दिन 29 जनवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 55 मिनिट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को ही रखा जाएगा. जिस पारण के बगैर श्री हरि का एकादशी व्रत अधूरा माना जाता है, वह अगले दिन 30 जनवरी 2026 को प्रात:काल 06:41 से 08:56 बजे के बीच किया जा सकेगा.
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026, बुधवार की शाम 4 बजकर 35 मिनिट से प्रारंभ होकर अगले दिन 29 जनवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 55 मिनिट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को ही रखा जाएगा. जिस पारण के बगैर श्री हरि का एकादशी व्रत अधूरा माना जाता है, वह अगले दिन 30 जनवरी 2026 को प्रात:काल 06:41 से 08:56 बजे के बीच किया जा सकेगा.
जया एकादशी महत्व
पद्म पुराण में जिक्र किया गया है कि जया एकादशी व्रत करने से हर तरह के पाप और अधम योनि से मुक्ति मिलती है. साथ ही साधक को जीवन में सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख मिलते हैं. मान्यता है कि जया एकादशी व्रत करने से मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है. अत: नियमों का पालन करते हुए यह व्रत करें.
पद्म पुराण में जिक्र किया गया है कि जया एकादशी व्रत करने से हर तरह के पाप और अधम योनि से मुक्ति मिलती है. साथ ही साधक को जीवन में सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख मिलते हैं. मान्यता है कि जया एकादशी व्रत करने से मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है. अत: नियमों का पालन करते हुए यह व्रत करें.
एकादशी व्रत के दिन क्या करें?
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत संकल्प लें. पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए क्योंकि पीला रंग भगवान श्रीहरि को प्रिय माना जाता है. भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें. इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है.
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत संकल्प लें. पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए क्योंकि पीला रंग भगवान श्रीहरि को प्रिय माना जाता है. भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें. इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है.
















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