मंदसौर : मंदसौर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। 22 साल पहले बिछड़ा बेटा आज अपनी मां से मिला, और इस मिलन की वजह बना चुनाव आयोग का अभियान स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR। मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया ने एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ दिया।
बेटा विनोद राजस्थान के नागौद में अपने परिवार के साथ रह रहा था
जब यह जानकारी विनोद की मां तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत थाना नई आबादी, मंदसौर में लिखित आवेदन दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए थाना प्रभारी उप निरीक्षक कुलदीप सिंह राठौर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने ग्राम पंचायत और तहसील निर्वाचन कार्यालय से रिकॉर्ड खंगाले और आखिरकार विनोद का वर्तमान पता तलाश लिया। जांच में सामने आया कि विनोद अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ सुरक्षित जीवन जी रहा है। बेटा विनोद राजस्थान के नागौद में अपने परिवार के साथ रह रहा था और उसके बच्चे भी हो चुके हैं।
बेटे को पाकर मां हुई भावुक और बेहद खुश
मां रामकन्या बाई बेटे से मिलकर बोली कि “मैंने तो उम्मीद छोड़ दी थी… आज भगवान ने मेरा बेटा लौटा दिया।” आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। दरअसल युवक विनोद ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत से अपने माता पिता का ईपीक नंबर मांगा, जानकारी उसकी मां तक पहुंची और मां को यकीन हो गया बेटा जिन्दा हैं। इसके बाद उसने थाना नई आबादी में पुलिस ने सारा काम कर दिया।
वहीं थाना प्रभारी कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि “यह हमारे लिए सिर्फ एक केस नहीं था, बल्कि एक मां की पीड़ा थी।” बेटा राजस्थान में अपने परिवार के साथ रह रहा था। लिहाजा नई आबादी थाना पुलिस के प्रयासों से 22 वर्षों से बिछड़ा परिवार फिर से एक हो गया। यह कहानी सिर्फ एक मुलाकात की नहीं, बल्कि सिस्टम, संवेदनशील पुलिसिंग और एक मां की अटूट उम्मीद को दर्शाती है।
















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