इंदौर : इन्दौर अब भिक्षावृत्ति मुक्त शहर के रूप में देश के मानचित्र पर एक नई प्रेरणादायक गाथा लिख रहा है । क्योंकि इस दिशा में जो सराहनीय काम किया है उसमें इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा का बहुत बड़ा योगदान है।
प्रधानमंत्री के ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ के स्वप्न को साकार करने कि दिशा में काम हुआ है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा देश भर से ऐसे 100 नागरिकों को चयनित किया गया है। इनमें संस्था के प्रतिनिधियों के अलावा ऐसे लोग भी शामिल है जिन्होंने भिक्षावृत्ति की राह छोड़कर सम्मान का जीवन चुना है।इस सूची में इंदौर शहर से 3 लोग गणतंत्र दिवस परेड में ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में कर्तव्य पथ पर शामिल होंगे।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कराई हवाई टिकट
कलेक्टर शिवम वर्मा ने इनके संघर्ष को सम्मान देते हुए निर्णय लिया कि इनका दिल्ली का सफर हवाई जहाज से होगा। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि उन लोगों के गौरव की उड़ान है जिन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटने का साहस दिखाया। जिला प्रशासन, नगर निगम, संस्था प्रवेश, महिला बाल विकास विभाग और श्रम विभाग के साझा प्रयासों से इन्दौर को भारत का पहला भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने का गौरव प्राप्त हुआ है।
इन्दौर के गौरवशाली प्रतिनिधि आरती प्रजापति कभी सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर थी, आज शासकीय स्कूल में कक्षा 4 की मेधावी छात्रा है, वही ज्योति प्रजापति भिक्षावृत्ति छोड़कर अब एक गेस्ट हाउस में हाउसकीपिंग के जरिए आजीविका कमा रही हैं । इसके साथ ही कभी भीख मांगने वाले रवि यादव अब स्वयं के हुनर से पैसे कमा रहे हैं। वो गोबर के गणेश मूर्ति का निर्माण कर स्वरोजगार से जुड़े हैं।
भिक्षावृति छोड़कर जी रहे सम्मान का जीवन
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि इंदौर शहर भिक्षु मुक्त शहर है और उसी के तहत हम उनका आदर शुरू करते हैं उनको रिहेबिलेट करके रोज़गार देने का भी प्रयास करते हैं। शिवम वर्मा ने कहा कि हमने ऐसे लोगों के भीख से हटाकर काम से जोडा और आज वो सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। अब ऐसे लोगों के दिल्ली से आमंत्रण आया है जो हमारे लिए गौरव की बात है।
















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