हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है और इस वर्ष करवा चौथ 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा. भारतीय संस्कृति में करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण का सुंदर प्रतीक है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूरा दिन बिना पानी पिए व्रत रखती हैं.
रात को जब चांद निकलता और चांद निकलने के बाद पहले छलनी से चांद को देखती हैं और फिर पति का चेहरा देखती हैं और यह पल हर सुहागिन महिला के लिए प्रेम और अटूट रिश्ते का पवित्र संकेत होता है. इस परंपरा के पीछे आस्था के साथ एक वैज्ञानिक कारण भी छिपा है. यह व्रत जहां पति-पत्नी के बीच प्यार और गहराई को बढ़ाता है, वहीं मन और शरीर को भी शांति और संतुलन देता है. आइए समझते हैं कि करवा चौथ की इस सुंदर परंपरा के धार्मिक और वैज्ञानिक पहलू क्या हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं.
















Users Today : 8
Total Users : 17657
Views Today : 8
Total views : 30880
Who's Online : 0
Server Time : June 28, 2026 9:45 am