आज के युग में जहां डिजिटल तकनीक मन को उत्तेजित करती है, परंतु शांति को छीन लेती है, वहां बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था का मिशन राजीपो एक ऐसा प्रकाश-पथ बनकर उभरा है, जहां आध्यात्मिक शिक्षा और चरित्र-निर्माण साथ-साथ चलते हैं. सन् 2024 में परम पूज्य महंत स्वामी महाराज ने यह दिव्य संकल्प किया कि विश्वभर के बालकों को संस्कृत श्लोकों का अध्ययन और पाठ करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है.” उन्होंने समझाया कि जो बालक संस्कृत श्लोकों को आत्मसात् करते हैं और उन्हें जीवन में उतारते हैं, वे केवल आध्यात्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति करते हैं.
















Users Today : 28
Total Users : 15251
Views Today : 35
Total views : 27946
Who's Online : 1
Server Time : February 25, 2026 12:55 pm