भोपाल। भोपाल जोन से रोजाना हजारों यात्री नौकरी, पढ़ाई, इलाज और पारिवारिक जरूरतों के लिए लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। इन यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे समय-समय पर कई ट्रेनों को ‘स्पेशल’ के तौर पर शुरू करते रहते हैं, ताकि यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिल सके। लेकिन अब यही ट्रेनें नियमित रूप से चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद इन्हें अब भी स्पेशल कैटेगरी में रखा गया है, जिससे भोपाल और आसपास के यात्रियों को हर सफर में 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा किराया चुकाना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि जब ट्रेनें अब अस्थायी नहीं रहीं, तो यात्रियों से अब भी स्पेशल किराया क्यों वसूला जाता है? इसी के चलते हाल ही में आरकेएमपी-अगरतल्ला समेत चार जोड़ी विशेष ट्रेनों की संचालन अवधि 2030 तक बढ़ा दी गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि ये सेवाएं अब नियमित हो चुकी हैं। ऐसे में यात्रियों को उम्मीद थी कि इन्हें सामान्य श्रेणी में शामिल किया जाएगा, लेकिन किराये में कोई राहत नहीं मिली। इससे भोपाल जोन के नियमित यात्रियों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्पेशल ट्रेन क्या होती है?
रेलवे में स्पेशल ट्रेनें आमतौर पर त्योहारों, कुंभ, गर्मी की छुट्टियों या अचानक बढ़ी भीड़ को संभालने के लिए चलाई जाती हैं। इन ट्रेनों का किराया सामान्य मेल-एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों की तुलना में 20-30 फीसदी अधिक होता है। कारण बताया जाता है कि यह अस्थायी व्यवस्था है, जिसमें अतिरिक्त संसाधन और संचालन लागत जुड़ी होती है। लेकिन जब कोई ट्रेन महीनों या वर्षों तक लगातार चलाई जाए, तो उसका स्पेशल होना खुद सवालों के घेरे में आ जाता है।
रेलवे से उठते सवाल
आरकेएमपी-अगरतल्ला सहित कई विशेष ट्रेनों की संचालन अवधि 2030 तक कर दी गई है। अब सवाल यह है कि अगर ट्रेनें नियमित हो गई हैं, तो उन्हें सामान्य श्रेणी में क्यों नहीं बदला जा रहा? क्या यात्रियों से ज्यादा किराया वसूलना सही है? क्या कोई स्पष्ट नीति है, जिसके तहत किसी ट्रेन को स्पेशल से रेगुलर घोषित किया जाता है?
स्पेशल ट्रेनों की लिस्ट
- 01665/01666 : आरकेएमपी-अगरतल्ला-आरकेएमपी
- 02132/02131 : जबलपुर-पुणे-जबलपुर
- 02198/02197 : जबलपुर-कोयंबटूर-जबलपुर
- 02134/02133 : जबलपुर-बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर
- 02187 : रीवा से छत्रपति शिवाजी टर्मिनस
- 02134 : जबलपुर से बांद्रा टर्मिनस
यात्रियों की जेब पर असर
स्पेशल ट्रेन होने की वजह से हर सफर में 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा किराया देना पड़ता है। जो लोग नौकरी, पढ़ाई या इलाज के लिए नियमित यात्रा करते हैं, उनके लिए यह बोझ और भी भारी है। जब कुछ ट्रेनें रोज चल रही है, तो यह स्पेशल कैसे हुई? कई यात्रियों का मानना है कि रेलवे राजस्व बढ़ाने के लिए जानबूझकर इन ट्रेनों को स्पेशल कैटेगरी में बनाए हुए है।
किराए से जुड़े निर्णय रेलवे बोर्ड स्तर पर होते हैं
स्पेशल ट्रेनों का संचालन यात्रियों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया जाता है। किराये से जुड़े निर्णय रेलवे बोर्ड के स्तर पर होते हैं, ताकि संचालन सुचारु और सुरक्षित बना रहे।
















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