उज्जैन. विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में प्रतिदिन श्रद्धा का अद्भुत सैलाब उमड़ता है. देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन की धार्मिक और पर्यटन पहचान को नई ऊंचाई मिली. इसके पश्चात श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और आज भी रोजाना लाखों लोग महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं. इससे शहर के विकास को नई गति मिली है.
अब महाकाल की इस पावन नगरी में एक और भव्य आध्यात्मिक आकर्षण जुड़ने जा रहा है. महाकाल लोक की तर्ज पर उज्जैन में जल्द ही शनि लोक का निर्माण होगा. 8 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9वें अन्नकूट महोत्सव एवं संध्या भजन कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए इसकी घोषणा की. इस अवसर पर शनि लोक निर्माण के लिए 110 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने की भी घोषणा की गई, जिससे उज्जैन को एक नई धार्मिक पहचान मिलेगी. मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित करने में जुट गई है. इसी क्रम में अब सरकार यहां ‘शनि लोक’ बनाने जा रही है. देखिए कि करीब 110 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला शनि लोक कैसा होगा और श्रद्धालुओं को यहां क्या सुविधाएं मिलेंगी?
जानिए कहा होगा शनि लोक का निर्माण
शनि लोक परियोजना का केंद्र उज्जैन-इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी क्षेत्र में शिप्रा नदी के तट पर विराजित प्राचीन शनि मंदिर को बनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य द्वारा की गई थी. यह देश का एकमात्र ऐसा प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है, जहां भगवान शनि शिव स्वरूप में पूजित हैं. विशेष रूप से शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर यहां आस्था का जनसैलाब उमड़ता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा नदी में पवित्र स्नान कर भगवान शनि के दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं.
महाकाल लोक में समुंद्र मंथन का दृश्य
महाकाल लोक जैसा दिखेगा नज़ारा
उज्जैन मे शनि लोक का धार्मिक कॉरिडोर कुंभ से पहले आकार ले लेगा. इसे महाकाल लोक की तर्ज पर ही विकसित किया जाएगा. शनि लोक की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बन चुकी है. टेंडर होने के बाद जल्द ही काम शुरू होगा. सरकार की ओर से पूरी कोशिश है कि सिंहस्थ के पहले शनि लोक तैयार हो जाए.
क्या है शनि मंदिर का इतिहास
मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी ने बताया, यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है. राजा विक्रमादित्य की जब साढ़ेसाती खत्म हुई थी, तब शनि महाराज राजा पर प्रसन्न हुए और यहां सारे ग्रह एक साथ प्रकट हुए. इसे शनि मंदिर में एक साथ विराजमान हुए, तभी से इस मंदिर में लोगों की आस्था है. यहां पर मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ-साथ ढैय्या शनि की भी प्रतिमा स्थापित है. बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य का इतिहास भी इस मंदिर से जुड़ा है. यही नहीं, यह शनि मंदिर पहला मंदिर है, जहां शनिदेव शिव रूप विराजमान हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाते हैं. कहा जाता है कि यहां साढ़ेसाती और ढैय्या की शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है.
















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