महाराष्ट्र में मुंबई नगर निगम (BMC) के मेयर पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है. चुनाव में महायुति की सहयोगी पार्टियों भाजपा और शिवसेना (शिंदे) को बहुमत मिलने के बावजूद अभी तक मेयर पद को लेकर फैसला नहीं हुआ है. शिवसेना (शिंदे) ने उनकी पार्टी के नेता को मेयर बनाने की मांग की है. इसी मांग को लेकर गतिरोध बना हुआ है. इस गतिरोध को दूर करने के लिए दिल्ली में एकनाथ शिंदे गुट के पूर्व सांसद राहुल शेवाले और बीजेपी के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम के बीच प्रारंभिक चर्चा शुरू हुई.
सूत्रों के अनुसार इस बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला. इस चर्चा के बाद BMC मेयर पद को लेकर बना अंतिम राजनीतिक गतिरोध अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के स्तर पर सुलझाया जाएगा.
मुंबई के मेयर पद को लेकर चल रही यह बातचीत राज्य की सियासत में अहम मानी जा रही है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला होने की संभावना है.
जानें बैठक में क्या हुआ
सूत्रों के अनुसार बीजेपी और शिवसेना नेताओं के बीच बैठक में गठबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया गया, लेकिन मेयर पद पर दोनों पार्टियों के बीच समाजस्य नहीं बन पाया.
शिवसेना का मानना है कि मुंबई में उन्होंने लंबे समय तक शासन किया और उनके पार्षद को मेयर बनाया जाना चाहिए, जबकि बीजेपी भी मुंबई में अपनी पकड़ बढ़ाना चाहती है. सूत्रों का कहना है कि भाजपा की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है कि मेयर पद के बदले अन्य नगर निकायों में शिवसेना को समर्थन दे सकती है, हालांकि अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है.
मेयर पद को लेकर गतिरोध कायम
मुंबई नगर निगम के चुनाव में 227 सदस्यीय बीएमसी में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटें मिली हैं. दोनों पार्टियों ने गठबंधन के लिए आवश्यक 114 का आंकड़ा पार कर गया. इस बीच शिवसेना (शिंदे गुट) ने ढाई-ढाई साल मेयर पद की मांग की और इसे लेकर दोनों में गतिरिध चल रहा है.
शिंदे गुट के नवनिर्वाचित पार्षदों को एक पांच सितारा होटल में रखा गया. इसे लेकर आरोप लगे थे कि टूट के डर से पार्षदों को कैद में रखा गया है. हालांकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित नगरसेवकों ने मंगलवार को बांद्रा के एक होटल से चेक आउट किया, जब उनके निर्वाचन को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला गजट अधिसूचना जारी की गई.
शिवसेना (शिंदे गुट) ने उठाए ये कदम
शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद 17 जनवरी से ताज लैंड्स एंड में रुके हुए थे. बीएमसी के नतीजों के तुरंत बाद, क्योंकि पार्टी लीगल फॉर्मैलिटीज पूरी होने और अलायंस के अंदर गतिरोध समाप्त होने का इंतजार कर रही थी.
गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ पार्षदों को अब ऑफिशियली काउंसलर के तौर पर मान्यता मिल गई है, जिससे शिवसेना अपने म्युनिसिपल पार्टी ग्रुप के रजिस्ट्रेशन के साथ आगे बढ़ सकती है और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ग्रुप का ग्रुप लीडर अपॉइंट कर सकती है.
















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