भोपाल। भोपाल को स्वच्छता सर्वे में सिरमौर बनाने के लिए नगर निगम ने लाखों रुपये की लागत से जो ‘बॉयो’ तकनीक आयात की थी, वह आज भ्रष्टाचार और बदहाली की भेंट चढ़ चुकी है। इंदौर की ब्रिक एन बांड इंफ्राकान कंपनी के साथ मिलकर शहर के पांच प्रमुख स्थानों बोट क्लब, म्यूजिकल फाउंटेन, सेल्फी प्वाइंट, संत नगर और कोलार पर बॉयो-टायलेट्स व बॉयो-गैस प्लांट लगाए गए थे, लेकिन हकीकत यह है कि तकनीक तो आई, पर सिस्टम इसे संभालना भूल गया।
नतीजतन, आज ये प्लांट सूखी पत्तियों के ढेर में दबे हैं और टायलेट्स कबाड़ बन चुके हैं। नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट का जिम्मा इंदौर की कंपनी को सौंपा था। अनुबंध के मुताबिक कंपनी को ही इनका संचालन और मेंटेनेंस करना था, लेकिन सूत्रों की मानें तो कंपनी के कर्ताधर्ता छह महीने के भीतर ही काम छोड़कर भाग गए।
सेंसर फेल, बदबू का पहरा
इन बॉयो-टायलेट्स की खासियत यह है कि इनकी स्मार्ट सेंसर प्रणाली और बॉयो-डाइजेस्टर टैंक था, जिसे सीवेज लाइन की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन आज बोट क्लब जैसे पर्यटन स्थलों पर ये टायलेट्स अंधेरे और गंदगी के टापू बन गए हैं। सेंसर गायब हैं, दरवाजे खुले और टूटे रहते हैं और पानी का कनेक्शन तक काट दिया गया है। यह तकनीक अब सुविधा के बजाय केवल बदबू फैलाने का जरिया बनकर रह गई है।
शो-बाजी में सब स्वाहा
ये प्लांट सिर्फ स्वच्छता सर्वे में नंबर पाने के लिए आनन-फानन में लगाए गए थे। बोट क्लब पर पड़ताल में सामने आया कि टायलेट्स के भीतर पान-मसाले के पाउच और गंदगी का अंबार है। टोटी और नल गायब हैं और केवल खाली टंकियां शो-पीस बनी खड़ी हैं। करोड़ों के इस प्रोजेक्ट को कबाड़ में तब्दील कर दिया है।
संबंधित अधिकारियों से बात करूंगी
मुझे इसके बारे में फिलहाल जानकारी नहीं है। इस बारे में संबंधित अधिकारियों से बात करूंगी। इसके बाद ही उस विषय में कुछ बात कर सकूंगी।
















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