जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार (24 अक्टूबर) को राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव कराए गए थे. इन चुनावों में तीन सीटें नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने जीतीं वहीं एक सीट भारतीय जनता पार्टी के पाले में गई है. केंद्र शासित क्षेत्र बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार राज्यसभा चुनाव कराए गए थे. बीजेपी की जीत वजह कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग बनी है. यही वजह है कि बीजेपी पर “हॉर्स ट्रेडिंग” के आरोप लगाए जा रहे हैं. सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी ज्यादा वोट मिलने पर सवाल खड़े किए हैं.
तीन सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार चौधरी मुहम्मद रमजान,सज्जाद किचलू और गुरुशरण (शमी) ओबेरॉय जीते हैं. एक सीट भाजपा के सत शर्मा ने जीती है. ये सीटें 15 फरवरी 2021 में खाली हुई थीं, जब पूर्व सांसदों गुलाम नबी आजाद और नजीर अहमद लावे ने अपना कार्यकाल पूरा किया था.
केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी के केवल 28 विधायक ही हैं. इसके बाद भी राज्यसभा चुनाव में पार्टी को 32 वोट हासिल हुए हैं. यही वजह है कि इन 4 वोटों को लेकर काफी चर्चा हो रही है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने एनसी उम्मीदवार इमरान नबी डार को हराकर चौथी सीट जीती हैं, जिन्हें 22 वोट मिले हैं.
जीत के बाद क्या बोले बीजेपी प्रत्याशी?
बीजेपी प्रत्याशी शर्मा ने अपनी जीत पर कहा, “मैं उन सभी का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया है मैंने सभी विधायकों से उनकी पार्टी की संबद्धता की परवाह किए बिना संपर्क किया और उनकी अंतरात्मा की आवाज पर वोट मांगे थे. इस जीत ने मुझे देश और पार्टी के लिए काम करने का एक मंच प्रदान किया है.”
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बीजेपी पर “खरीद-फरोख्त” का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, “बीजेपी के पास संख्या बल नहीं था. इससे साफ है कि बीजेपी ने इस चुनाव में खरीद-फरोख्त का सहारा लिया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि जिन लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के बाद बीजेपी को वोट दिया, उन्हें “अपने नाम बताने चाहिए.” उन्होंने आगे कहा हम उन विधायकों की पहचान करेंगे उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस को वोट देने का वादा करने के बाद बीजेपी को वोट दिया है.
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के वोट बरकरार रहे, जैसा कि चुनाव एजेंट ने प्रत्येक मतदान पर्ची को देखा है. “हमारे किसी भी विधायक ने क्रॉस-वोटिंग नहीं की, इसलिए सवाल उठता है. बीजेपी के चार अतिरिक्त वोट कहां से आए?” वे कौन विधायक थे जिन्होंने मतदान करते समय गलत वरीयता संख्या अंकित करके जानबूझकर अपने वोट अमान्य कर दिए?
उन्होंने आगे कहा कि क्या उनमें इतनी हिम्मत है कि वे हमें वोट देने का वादा करने के बाद बीजेपी की मदद करने की बात स्वीकार करें? किस दबाव या प्रलोभन ने उन्हें यह चुनाव करने में मदद की? देखते हैं कि बीजेपी की गुप्त टीम में से कोई अपनी आत्मा बेचने की बात स्वीकार करता है या नहीं. उमर के आरोपों पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी ने कुछ नहीं कहा है.
















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