इन्दौर, 2 अक्टूबर। मेडिकल कॉलेज इन्दौर के सेवानिवृत्त सह-प्राध्यापक (फिज़ियोलॉजी) डॉ. मनोहर लाल भण्डारी ने राज्यपाल महोदय के नाम से जारी आदेशों की लगातार अनदेखी पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए प्रेस के माध्यम से कहा कि यह न केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों का हनन है, बल्कि राज्यपाल की संवैधानिक गरिमा पर भी सीधा प्रहार है।
डॉ. भण्डारी ने बताया कि—
1. उन्हें ग्रेड पे का लाभ अक्टूबर 2015 से मिलना चाहिए था, जिसके लिए शासनादेश 17.04.2013 को ही जारी हो चुका था, परंतु शासन-प्रशासन की लापरवाही से यह आदेश 7½ वर्ष बाद, 10.01.2023 को लागू हुआ।
2. इसके बावजूद अधिष्ठाता ने आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिसके चलते नवंबर 2024 में आंशिक पालन हुआ।
3. पेंशन निर्धारण और एरियर (01.01.2021 से) आज तक लंबित हैं।
4. प्रदेश के सभी विभागों को सातवें वेतनमान का लाभ 01.01.2016 से मिला, जबकि चिकित्सा शिक्षकों को अन्यायपूर्ण ढंग से 01.04.2018 से दिया गया। लंबे संघर्ष, धरना और अखबारों की मुहिम के बाद 25.02.2025 को शासनादेश जारी हुआ, वह भी अपूर्ण लाभों के साथ।
डॉ. भण्डारी ने कहा कि यदि राज्यपाल के नाम से जारी आदेशों का पालन वर्षों तक नहीं होता, तो जनता के बीच यह संदेश जाता है कि राज्यपाल के आदेश का भी प्रशासन में कोई महत्व नहीं। उन्होंने मांग रखी कि—
• 10.01.2023 और 25.02.2025 के शासनादेशों का पूर्ण पालन कर एरियर और पेंशन PPO तुरंत जारी किए जाएँ।
• भविष्य में राज्यपाल महोदय के नाम से जारी आदेशों का अनुपालन अधिकतम दो माह में अनिवार्य किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेशों की अवमानना यूँ ही चलती रही तो यह परंपरा “राज्यपाल के नाम और आदेशानुसार” लिखने की महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
डॉ. भण्डारी ने इसे केवल व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि संवैधानिक गरिमा और राज्यपाल के पद के सम्मान से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “अब यह मामला लोकतंत्र के चौथे स्तंभ तक पहुँचना अनिवार्य हो गया है।”
संलग्न : शासनादेश दिनांक 10.01.2023 और 25.02.2025
डॉ. मनोहर भण्डारी
सेवानिवृत्त सह-प्राध्यापक (फिजियोलॉजी), मेडिकल कॉलेज, इन्दौर
मो.: 94250 32324
















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