इंदौर। जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया के पहले चरण में 24.20 लाख मतदाताओं ने फार्म भरकर दिए थे। इसमें से 5.70 लाख मतदाता तार्किक त्रुटि श्रेणी में सामने आए हैं। जिनके रिकार्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से तो मैप हो गए हैं, लेकिन विवरणों में विसंगतियों के कारण वे संदेह के घेरे में हैं। इनके नाम, जन्म तारीख और माता-पिता के नाम काे लेकर विसंगतियां है। ऐसे मतदाताओं को नोटिस देने का कार्य शुरू किया गया है। सात दिन बाद सुनवाई शुरू होगी और मतदाता को वर्तमान नाम, जन्म तारीख की सही जानकारी वाला एक दस्तावेज देना होगा।
जिले में 1.33 लाख मतदाताओं की सुनवाई जारी है, जिनकी जानकारी 2003 की सूची से मेपिंग नहीं हो सकी थी। इसके लिए 98 केंद्र बनाए गए है। सुनवाई के दौरान दिए जाने वाले दस्तावेज की जांच के लिए ग्यारह नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए है।
यह नोडल अधिकारी दस्तावेज की जांच कर पोर्टल पर ओके की रिपोर्ट दर्ज कर रहे है। इसके अलावा तार्किक त्रुटी वाले 5.70 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी करने का कार्य शुरू हो चुका है। निर्वाचन आयोग के साफ्टवेयर द्वारा रिकार्ड मिलान के दौरान इन मतदाताओं को लेकर पांच प्रकार की तार्किंग त्रुटियां सामने आई थी।
इनमें सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है, जिनके पिता का नाम 2003 की सूची से मेल नहीं खा रहा। इसके अलावा नाम की स्पेलिंग में गलती, नाम का अधूरा होना, सरनेम में बदलाव और जन्मतिथि में अंतर जैसी त्रुटियां भी सामने आई हैं। इन मतदाताओं को आयोग ने संदेह के घेरे में रखा है। अब इन मतदाताओं को नोटिस के बाद सही नाम, जन्मतारीख वाला दस्तावेज देना होगा।
बीएलओ की पुष्टि जरूरी
तार्किक त्रुटि वाले मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे है और नोटिस के बाद दस्तावेज लेकर उपस्थित होना होगा। इन दस्तावेज की पुष्टि बीएलओं को करना होगी कि यह दस्तावेज उक्त मतदाता का है। इसके बाद घोषणा पत्र भरकर पोर्टल पर दर्ज कर दिया जाएगा। आयोग नाम और जन्म तारीख की गफलत को दूर करने के लिए दस्तावेज ले रहा है। क्योकि 2003 से 2026 तक मतदाता के नाम और तारीख में सुधार हुआ है। ऐसे में मतदाता से वर्तमान का सही दस्तावेज लिया जाएगा।
लंबी प्रक्रिया से परेशानी
एसआइआर की लंबी प्रक्रिया से अधिकारी, बीएलओ से लेकर मतदाता सभी परेशान हो चुके है। पहले डेढ़ माह फार्म भरने के लिए मस्कत करना पड़ी, इसके बाद दावे-आपत्ति की एक माह लंबी प्रक्रिया चली। 1.33 लाख मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के बाद अब 5.70 लाख मतदाता को नोटिस और सुनवाई करना होगी। बीएलओ का कहना है कि पहले ही मतदाता के घर तीन बार जाकर कागज ले चुके है और अब फिर से नोटिस देकर कागज बुलाने से मतदाता नाराज हो रहे है।
ये त्रुटियां आईं सामने
- मतदाता का नाम 2003 की सूची से अलग
- पिता के नाम और सरनेम को लेकर विसंगति
- पिता और दादा की उम्र को लेकर विसंगति
- छह से अधिक मैपिंग को लेकर भी परेशानी है
















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