भोपाल। मध्य प्रदेश में 15 महीने के अपवाद को छोड़ दें तो कांग्रेस करीब 22 वर्षों से सत्ता से बाहर है, इसके बाद भी प्रभावी विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पा रही। संगठन का हाल देखें तो कई प्रयासों के बाद भी पार्टी जहां के तहां खड़ी है। गुटबाजी से वह मुक्त नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि एक ही समय में दो बड़े नेता दो जगह से पदयात्रा निकाल रहे हैं। मुद्दे भी ऐसे हैं जो बहुत अपील नहीं करते।
जब सारा प्रदेश दूषित पेयजल से हो रही मौतों पर चिंतित है, तब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सीहोर जिले से मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने और एक्ट में बदलाव करने के विरोध में पदयात्रा कर रहे हैं। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी रायसेन जिले में ‘बूथ चलो, गांव चलो’ यात्रा निकाल रहे हैं।
यही वजह है कि संगठन से सड़क तक कांग्रेस की कमजोरी दूर नहीं हो पा रही है। मुद्दों से दूर होकर सत्ता में वापसी का सपना देखने वाले कांग्रेस नेताओं के पास जनता की नब्ज टटोलने का कोई फार्मूला फिलहाल नहीं दिखता। दोनों के मुद्दे जनता को फिलहाल अपील नहीं कर पा रहे। कुछ दिन पहले इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर कांग्रेस नेतृत्व के सामने मुश्किलें खड़ी करने वाले दिग्विजय सिंह की सक्रियता बता रही है कि वे भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बता दें, जून में दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
कांग्रेस में चल रही दो समानांतर पदयात्राओं ने पार्टी के अंदर की गुटबाजी को फिर से हवा दे दी है। पहले कांग्रेस में जिस तरह महाकोशल अंचल में कमल नाथ कांग्रेस, मध्य भारत में दिग्विजय सिंह कांग्रेस, ग्वालियर- चंबल में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस, विंध्य में अजय सिंह कांग्रेस और मालवा में अरुण यादव की कांग्रेस अलग-अलग दिखाई पड़ती थी।
सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है
सुरेश पचौरी और सत्यव्रत चतुर्वेदी जैसे नेता भी अलग रंग में रहते थे, लगता है कांग्रेस में वही दौर वापस आ रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस में गुटबाजी कुछ हद तक कम हुई थी, लेकिन अब फिर वहीं स्थिति बन गई है। दो समानांतर यात्राएं तो यही संदेश दे रही हैं कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दोनों नेताओं द्वारा एक ही समय में अलग- अलग मुद्दों पर यात्राएं निकालने से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी गलत संदेश जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस में दो बड़े नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है।
पार्टी जनता की लड़ाई लड़ रही है
दोनों कार्यक्रम तयशुदा थे। दोनों कार्यक्रम एआईसीसी और पीसीसी के सर्कुलर के हिसाब से हुए हैं। पार्टी पूरी ताकत से जनता की लड़ाई लड़ रही है।
















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