महाराष्ट्र की सियासत में अजब और गजब नजारे देखने को मिल रहे हैं. कहीं बीजेपी कांग्रेस से हाथ मिला रही है तो कहीं उसे ओवैसी की पार्टी AIMIM के पार्षदों का साथ मिल रहा है. अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस के हाथ मिलाने के बाद अकोट में AIMIM के पार्षदों ने बीजेपी और एनसीपी को समर्थन दे दिया है.
अकोट नगर परिषद में कुल 35 सीटें हैं, जिनमें से 33 सीटों पर हाल ही में चुनाव हुए थे. बीजेपी 11 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि AIMIM को पांच सीटें मिलीं और वह तीसरे स्थान पर रही. गवर्निंग बोर्ड बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 17 पार्षदों के समर्थन की ज़रूरत होती है.
अलग-अलग पार्टियों के पार्षद एकसाथ
बोर्ड बनाने की एक रणनीतिक चाल में बीजेपी ने ‘अकोट विकास मंच’ नाम के एक नए बैनर के तहत अलग-अलग पार्टियों के पार्षदों को एक साथ लाया है. इसमें शिंदे सेना, शिवसेना (UBT), NCP (शरद पवार), NCP (अजित पवार), प्रहार जनशक्ति पार्टी और AIMIM के चार बागी पार्षद शामिल हैं. बीजेपी ने इस गठबंधन के गठन को रजिस्टर करने के लिए अकोला कलेक्टर को एक औपचारिक पत्र सौंपा है. इस बदलाव के साथ, कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी अब विपक्ष में हैं, जबकि AIMIM के पास नगर परिषद में सिर्फ एक पार्षद बचा है.
इस नए गठबंधन को अकोला जिला प्रशासन के पास पंजीकृत भी किया जा चुका है. AIMIM नेता इम्तियाज़ जलील ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए अकोला के पार्टी नेताओं के खिलाफ एक्शन की बात की है. उन्होंने कहा कि हमें इस गठबंधन की जानकारी नहीं है. अगर हमारे किसी स्थानीय नेता ने BJP से गठबंधन किया होगा, तो उस पर कार्रवाई होगी. BJP के साथ किसी भी कीमत पर गठबंधन नहीं होगा.
एक ओर अंबरनाथ और अकोट में बने ये नए समीकरण हैं तो दूसरी ओर महागठबंधन के भीतर बढ़ता असंतोष. अब सवाल यही है कि सत्ता के लिए बने ये अप्रत्याशित गठबंधन राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाएंगे.
















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