भारतीय रेलवे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दशकों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के दिल को तोड़ दिया है. रिटायरमेंट के वक्त सम्मान के तौर पर दिए जाने वाले गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल अब नकली निकले हैं. जांच में साफ हुआ है कि ये मेडल चांदी के नहीं, बल्कि लगभग पूरी तरह तांबे से बने थे. इनमें चांदी की मात्रा सिर्फ 0.23 प्रतिशत पाई गई. यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों की भावनाओं का है, जिन्होंने पूरी जिंदगी रेलवे की सेवा में लगा दी.
यह हमारी जिंदगी की कमाई थी
पश्चिम मध्य रेलवे से रिटायर हुए टीके गौतम, जो चीफ लोको इंस्पेक्टर रह चुके हैं, कहते हैं कि यह सिक्का मेरे लिए एक यादगार नहीं, बल्कि मेरी पूरी नौकरी की पहचान थी. पहले ऐसे मेडल सरकारी टकसाल में बनते थे. अब लगता है कि हमारा सम्मान ही नकली था. उनकी तरह कई रिटायर्ड कर्मचारी अब परेशान हैं कि जो सम्मान उन्हें मिला, वो भी फर्जी निकला.
36 साल की सेवा के बाद लगा धोखा
भोपाल कोच फैक्ट्री से जनवरी 2025 में रिटायर हुईं हसरत जहां ने बताया कि उन्होंने मेडल को बड़े जतन से ड्राइंग रूम में सजाकर रखा था. हमें बताया गया था कि यह 99 प्रतिशत चांदी का है. अब रेलवे खुद FIR कर रही है और कह रही है कि यह तांबे का है. यह सिर्फ धोखा नहीं, अपमान है.
कहां से खरीदे गए थे मेडल?
ये मेडल पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा जनवरी 2023 में खरीदे गए थे.
सप्लायर: इंदौर की फर्म M/s Viable Diamonds
ऑर्डर: 3,640 मेडल
सप्लाई: 3,631 मेडल
वजन: 20 ग्राम प्रति मेडल
कीमत: ₹2000 से ₹2200 प्रति मेडल
यानी रेलवे को प्रति मेडल करीब ₹2200 का नुकसान हुआ. कुल मिलाकर यह मामला करोड़ों के घोटाले की ओर इशारा करता है.
सप्लायर: इंदौर की फर्म M/s Viable Diamonds
ऑर्डर: 3,640 मेडल
सप्लाई: 3,631 मेडल
वजन: 20 ग्राम प्रति मेडल
कीमत: ₹2000 से ₹2200 प्रति मेडल
यानी रेलवे को प्रति मेडल करीब ₹2200 का नुकसान हुआ. कुल मिलाकर यह मामला करोड़ों के घोटाले की ओर इशारा करता है.
जांच में खुली पोल
जब मेडल की गुणवत्ता पर सवाल उठे, तो रेलवे विजिलेंस ने NABL मान्यता प्राप्त लैब और सरकारी प्रयोगशाला में जांच करवाई. रिपोर्ट में साफ लिखा गया मेडल लगभग पूरी तरह तांबे के हैं. इसके बाद सप्लायर को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, बचे हुए मेडल जब्त किए जा रहे हैं और भोपाल में FIR दर्ज की गई है. पश्चिम मध्य रेलवे के CPRO हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि संयुक्त जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सिर्फ पैसा नहीं, भरोसे का सवाल
यह मामला अब सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी का नहीं रहा. यह उन कर्मचारियों के सम्मान, भरोसे और आत्मसम्मान से जुड़ा है, जिन्होंने देश की रेल व्यवस्था को चलाने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी. रिटायरमेंट पर मिला यह फर्जी सम्मान सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.







