सनातन धर्म शास्त्र और पुराण कथाओं से भरे पड़े हैं. शास्त्रों और पुराणों में कई ऐसी कथाएं मिलती हैं जो बहुत दिलचस्प हैं और हैरान करती हैं. ऐसी ही हैरान कर देने वाली कथा शिव पुराण में मिलती है. ये कथा समुद्र के पानी को लेकर है. शिव पुराण की कथा में बताया गया है कि एक बार समुद्र के पानी के मीठे पन को छीन लिया गया.
पौराणिक कथा के अनुसार…
पौराणिक कथा के अनुसार, हिमालय की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप शुरू किया. ये कठिन तप माता समुद्र तट पर कर रहीं थीं. उनकी इस साधना तेज बहुत प्रबल था. इस वजह से तीनों लोकों में हलचल मच गई. वहीं माता के तपस्वी स्वरूप को देख समुद्र देव (वरुण देव) उन पर मुग्ध हो गए. इसके बाद वो देवी पार्वती के सामने प्रकट हुए और उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रख दिया.
इसके बाद माता पार्वती ने अत्यंत शांत और गरिमापूर्ण ढंग से समुद्र देव के विवाह के प्रस्ताव को स्वीकार करने से मना कर दिया. उन्होंने समुद्र देव से कहा कि उनका ह्रदय और जीवन सिर्फ महादेव के लिए समर्पित है. वो उनसे विवाह का संकल्प ले चुकी हैं. माता के मुख से महादेव की प्रशंसा सुनकर समुद्र देव के अहंकार को ठेस पहुंची. इसके बाद वो क्रोध में आ गए और भगवान शंकर की बुराई करनी शुरू कर दी.
समुद्र देव ने किया महादेव का अपमान
उन्होंने भगवान शिव का अपमान करते हुए कहा कि वो सिर्फ भस्मधारी वैरागी हैं. फिर समुद्र ने अपनी प्रशंसा करते हुए कहा कि वो सर्वगुण संपन्न हैं. विशाल हैं. समस्त संसार की प्यास बुझाते हैं. उन्होंने माता पार्वती से कहा कि वो एक आदिवासी को छोड़ दें और समुद्र की रानी बनें. माता पार्वती अपने होने वाले पति का अपमान सहन न कर सकीं. वो समुद्र से क्रोधित हो उठीं.
मां पार्वती ने दिया श्राप
माता ने गरगते हुए कहा कि जिसे मीठे जल और उपयोगिता पर तुमको इतना अहंकार है, उसका आज ही नाश हो जाएगा. तुम्हारा जल मनुष्यों के लिए व्यर्थ हो जाएगा. समुद्र देव को श्राप देते हुए माता पार्वती ने कहा कि तुम्हारा जल आज से खारा हो जाएगा. कोई मनुष्य अपनी प्यास बुझाने के लिए तुम्हारे जल की एक बूंद भी ग्रहण करेगा. कहा जाता है कि माता पार्वती के श्राप की वजह से ही समुद्र का जल खारा हो गया.
















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